24 अप्रैल 2026
नई दिल्ली:
पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के विधानसभा चुनावों में इस बार जनता ने जोश के मामले में पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, आजादी के बाद के इतिहास में यह अब तक का सबसे बड़ा मतदान प्रतिशत है। सबसे खास बात यह रही कि बंगाल जैसे राज्य में, जो अक्सर चुनावी हिंसा के लिए चर्चा में रहता है, इस बार पांच दशकों के बाद पहली बार बिना किसी बड़ी हिंसा के शांतिपूर्ण तरीके से वोट डाले गए।
बंगाल में टूटा रिकॉर्ड, महिलाओं ने दिखाया दम
पश्चिम बंगाल के पहले चरण में 152 सीटों पर मतदान हुआ, जहाँ भारी संख्या में लोग घरों से बाहर निकले। यहाँ कुल 92.86 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई, जो अपने आप में एक मिसाल है। चुनाव अधिकारियों का कहना है कि इस बार पुरुषों के मुकाबले महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिसकी वजह से वोटिंग का ग्राफ इतना ऊंचा गया है। राज्य के 16 जिलों में चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह शांतिपूर्ण रही, जिसे लोकतंत्र की बड़ी जीत माना जा रहा है।
तमिलनाडु में भी दिखा जबरदस्त उत्साह
दक्षिण भारत के राज्य तमिलनाडु में भी मतदाताओं का मिजाज कुछ ऐसा ही रहा। यहाँ की सभी 234 सीटों पर एक साथ चुनाव हुए, जिसमें कुल 85.14 प्रतिशत मतदान हुआ। राज्य के करूर जिले में सबसे ज्यादा वोटिंग देखी गई। तेज गर्मी और 40 डिग्री तापमान के बावजूद, शाम तक पोलिंग बूथों पर लंबी कतारें लगी रहीं। युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक, हर वर्ग में अपनी सरकार चुनने को लेकर काफी उत्साह नजर आया।
क्या कहते हैं ये आंकड़े?
इतिहास गवाह है कि जब-जब बंगाल में रिकॉर्ड तोड़ मतदान हुआ है, तब-तब सत्ता में बड़ा बदलाव देखने को मिला है।
साल 1967 में जब 62.5 प्रतिशत वोटिंग हुई थी, तब कांग्रेस को सत्ता से बाहर होना पड़ा था।
1977 में इमरजेंसी के बाद हुए चुनाव में भी भारी मतदान के कारण सरकार बदल गई थी।
साल 2011 में जब ममता बनर्जी की सरकार आई थी, तब भी वोटिंग का प्रतिशत काफी ज्यादा रहा था।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इस ऐतिहासिक मतदान पर खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि हिंसा मुक्त चुनाव कराना उनकी प्राथमिकता थी और बंगाल में पांच दशक बाद ऐसा माहौल देखना सुखद है। अब सबकी नजरें चुनावी नतीजों पर टिकी हैं कि जनता का यह भारी समर्थन किस पार्टी की किस्मत चमकाता है।


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