21 अप्रैल 2026
नई दिल्ली:
भारत और दक्षिण कोरिया के बीच आर्थिक रिश्तों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने की तैयारी शुरू हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग के बीच नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में हुई द्विपक्षीय बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए। दोनों देशों ने साल 2030 तक आपसी व्यापार को बढ़ाकर 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का संकल्प लिया है।
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने जानकारी दी कि वर्तमान में भारत और कोरिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार 27 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है। इसे लगभग दोगुना करने के लिए दोनों देशों ने कई महत्वपूर्ण समझौतों (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। पीएम मोदी ने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्य, बाजार आधारित अर्थव्यवस्था और कानून का सम्मान करना दोनों देशों के स्वभाव में शामिल है, जो इस साझेदारी को और मजबूत बनाता है।
भारत-कोरिया आर्थिक फोरम का आगाज
आर्थिक सहयोग को सरल बनाने के लिए ‘भारत-कोरिया फाइनेंशियल फोरम’ की शुरुआत की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच पैसों के लेनदेन और निवेश की प्रक्रिया को सुगम बनाना है। साथ ही, औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक ‘इंडस्ट्रियल कॉपरेशन कमेटी’ का गठन भी किया गया है।
दक्षिण कोरिया की छोटी और मध्यम श्रेणी की कंपनियों (SME) को भारत में व्यापार शुरू करने में आसानी हो, इसके लिए देश में ‘कोरियन इंडस्ट्रियल टाउनशिप’ स्थापित की जाएगी। इसके अलावा, तकनीकी क्षेत्र में हाथ मिलाने के लिए ‘इंडिया-कोरिया डिजिटल ब्रिज’ लॉन्च किया जा रहा है, जिससे एआई (AI), सेमीकंडक्टर और आईटी जैसे आधुनिक क्षेत्रों में मिलकर काम किया जा सकेगा।
इन क्षेत्रों पर रहेगा खास फोकस
दोनों देशों के बीच हुए समझौतों में शिप बिल्डिंग, सस्टेनेबिलिटी और स्टील जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। पीएम मोदी ने यह भी रेखांकित किया कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और प्रगति के लिए दोनों देशों का दृष्टिकोण एक समान है, जो भविष्य में वैश्विक स्तर पर एक मजबूत आर्थिक मोर्चा तैयार करेगा।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और दक्षिण कोरिया के बीच का यह समझौता केवल व्यापारिक आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके दूरगामी परिणाम होंगे:
चीन का मजबूत विकल्प
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक कंपनियां अब ‘चीन प्लस वन’ की रणनीति पर काम कर रही हैं। ऐसे में दक्षिण कोरियाई कंपनियों का भारत में ‘इंडस्ट्रियल टाउनशिप’ बनाना यह दर्शाता है कि वे भारत को एक बड़े मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में देख रहे हैं। यह कदम भारत के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को नई रफ्तार l
सेमीकंडक्टर और एआई (AI) के क्षेत्र में दक्षिण कोरिया दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है। विशेषज्ञों का कहना है कि ‘इंडिया-कोरिया डिजिटल ब्रिज’ के माध्यम से भारत को अत्याधुनिक तकनीक हासिल होगी, जो भारत के डिजिटल मिशन और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के सपने के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है।
आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि जब कोरियाई कंपनियां भारत में अपनी इकाइयां लगाएंगी और भारी उद्योगों (जैसे स्टील और शिप बिल्डिंग) में निवेश करेंगी, तो इससे देश के युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर कुशल रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
विशेषज्ञ यह भी रेखांकित करते हैं कि शिप बिल्डिंग और सस्टेनेबिलिटी में सहयोग से वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की हिस्सेदारी बढ़ेगी। इससे न केवल निर्यात बढ़ेगा, बल्कि व्यापार घाटे को कम करने में भी मदद मिलेगी।


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