भोपाल में विजय मेवाड़ा हत्याकांड को लेकर फूटा गुस्सा; 2000 लोगों ने कैंडल मार्च निकालकर मांगा न्याय

khabar pradhan

संवाददाता

6 April 2026

अपडेटेड: 4:01 PM 0thGMT+0530

भोपाल में विजय मेवाड़ा हत्याकांड को लेकर फूटा गुस्सा; 2000 लोगों ने कैंडल मार्च निकालकर मांगा न्याय

6 अप्रैल 2026
भोपाल :

भोपाल के अशोका गार्डन इलाके में विजय मेवाड़ा की निर्मम हत्या के बाद से जनता में गहरा आक्रोश है। रविवार को इस जघन्य हत्याकांड के विरोध में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए और एक विशाल कैंडल मार्च निकालकर दिवंगत विजय मेवाड़ा के लिए न्याय की गुहार लगाई। यह कैंडल मार्च अशोका गार्डन के दशहरा मैदान से शुरू होकर प्रभात चौराहे तक गया।

आपको बता दें कि 29-30 मार्च की रात, अशोका गार्डन क्षेत्र में रहने वाले 35 वर्षीय विजय मेवाड़ा की चाकू घोंपकर बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। विजय होटल  के  कर्मचारी को छोड़ने उसके घर जा रहे थे, तभी अपराधी आसिफ़ बम और फरमान ने उनकी निर्ममता से हत्या कर दी थी l

पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए तीनों आरोपियों – आसिफ बम, इमरान और फरहान – को गिरफ्तार कर लिया है। बताया जा रहा है कि आसिफ बम का शॉर्ट एनकाउंटर भी हुआ है।

न्याय की मांग के साथ “शांतिपूर्ण” आक्रोश
रविवार शाम करीब 7 बजे दशहरा मैदान में 2000 से अधिक लोग हाथों में मोमबत्तियां और मोबाइल टॉर्च लेकर जमा हुए। इस विशाल कैंडल मार्च का उद्देश्य विजय मेवाड़ा के परिवार को ढांढस बंधाना और आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग करना था।
कैंडल मार्च में हिंदू सनातनी संगठन, स्थानीय नागरिक, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और विजय के परिवार के सदस्य शामिल हुए। सभी ने “दोषियों को फांसी दो” के नारे लगाए।
इस दौरान प्रदेश के कैबिनेट मंत्री विश्वास कैलाश सारंग भी कैंडल मार्च में पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। मंत्री सारंग ने परिवार को विश्वास दिलाया कि आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

लोगों में इस हत्याकांड को लेकर काफी गुस्सा है। कैंडल मार्च में शामिल लोग दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग कर रहे थे। वहीं, कुछ लोगों ने तो आरोपियों के एनकाउंटर की भी मांग उठाई है। इस घटना ने एक बार फिर शहर में कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विजय मेवाड़ा हत्याकांड ने भोपाल को दहला दिया है। हजारों लोगों का सड़क पर उतरना यह दर्शाता है कि आम नागरिक अब इस तरह के अपराधों को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं। अब सबकी नजरें कोर्ट और पुलिस की कार्रवाई पर टिकी हैं।

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