5 मार्च 2026:
मध्य प्रदेश भोपाल:
एक लाख सरकारी कर्मचारियों को हाई कोर्ट के फैसले के अनुसार 400 करोड़ देने का है मामला:
मध्य प्रदेश के 1 लाख से ज्यादा सरकारी कर्मचारियों को वेतन कटौती के मामले में झटका लग सकता है। जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार इस प्रकरण में सर्वोच्च न्यायालय का रुख कर सकती है।
इस विवाद में वर्ष 2019 में असोसिएशन सरकार का वह फैसला सुनाया गया, जिसमें कर्मचारियों के वेतन में कटौती की गई थी। इस फैसले को चुनौती देते हुए मामला उच्च न्यायालय में पहुंचाया गया था।
हाल ही में हाई कोर्ट ने अपने फैसले में 2019 के उस आदेश को गैरकानूनी करार दिया। कोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि जब कर्मचारियों से पूरा काम लिया जा रहा है, तो उन्हें पूरा वेतन भी दिया जाना चाहिए।
400 करोड़ रुपये का एरियर
उच्च न्यायालय ने कर्मचारियों को एरियर भुगतान करने का भी निर्देश दिया, वर्गीकरण में कटौती की गई थी। बताया जा रहा है कि कुल एरियर राशि लगभग 400 करोड़ रुपये के आसपास है। इस फैसले के बाद राज्य सरकार पर बड़ा वित्तीय बोझ पड़ सकता है।
अब सुप्रीम कोर्ट में होगी कानूनी लड़ाई?
दस्तावेज़ के अनुसार, राज्य सरकार उच्च न्यायालय के आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने की तैयारी कर रही है। यदि सरकारी अपील जारी है, तो इस मामले में अंतिम निर्णय शीर्ष अदालत से आएगा।
कर्मचारियों की नजर पर फैसला
एक लाख से ज्यादा स्टाफ ने इस पूरी घटना पर नजर रखी है। यदि सर्वोच्च न्यायालय में अपील की जाती है, तो मामले के अनुसार तक एरियर भुगतान की स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकती है।
वेतन कटौती और एरियर भुगतान का यह मामला अब कानूनी और वित्तीय दोनों दृष्टि से अहम बन गया है। आने वाले दिनों में सरकार के अगले कदम पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
क्या है मामला:
वर्ष 2018 से पहले मध्य प्रदेश में सरकारी चयन मंडल से सरकारी पदों पर जो भर्तियां होती थी उनमें तृतीया और चतुर्थ वर्ग में आने वाले कर्मचारियों के लिए 2 साल का प्रोफेशन पीरियड रखा जाता था इसमें नियुक्ति होने के बाद कर्मचारियों को पूरी सैलरी मिली शुरू होती थी । किंतु 2019 में कमलनाथ सरकार ने इस व्यवस्था में परिवर्तन किया । जिसमें सामान्य प्रशासन विभाग की तरफ से जो आदेश जारी हुआ उसमें प्रोविजन पीरियड को 2 साल से बढ़कर 4 साल कर दिया। इसके अलावा वेतन में भी बदलाव करते हुए 4 साल का स्टाइपेंड देने का फैसला किया।
मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार आने के बाद कमलनाथ सरकार की तरफ से लागू किए गए इस नियम को बदलने का फैसला किया गया । किंतु मध्य प्रदेश की सरकार से यह नियम अभी तक नहीं बदल गया। ऐसे में कर्मचारी संगठनों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और प्रोबेशन पीरियड 2 साल ही करने का मामला उठाया।
हाई कोर्ट ने इसे सामान्य के अधिकार का उल्लंघन बताते हुए कर्मचारियों को सम्मान वेतन और एरियर देने का फैसला सुना दिया।अब मध्य प्रदेश की सरकार हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है।


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