मकरसंक्रांति के बाद सपा में बड़े बदलाव के संकेत टिकट फाइनल करने का काम किया शुरू

khabar pradhan

संवाददाता

10 January 2026

अपडेटेड: 4:55 PM 0thGMT+0530

मकरसंक्रांति के बाद सपा में बड़े बदलाव के संकेत टिकट फाइनल करने का काम किया शुरू


यूपी पॉलिटिक्स : समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पूरी तरह से चुनावी मोड पर आ चुके हैं उन्होंने यूपी में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है. सपा इस बार की कमी नहीं रखना चाहती इसीलिए अपने संगठन को बूथ स्तर पर मजबूत करने की पूरी योजना बनाई है एक बार फिर पार्टी बड़े स्तर पर बदलाव करने की तैयारी में है. खबर है मकर संक्रांति के बाद सपा संगठन में कई बड़े पदों पर बदलाव कर सकती है. इस दौरान कई जिलों में जिलाध्यक्ष भी बदले जा सकते हैं, वहीं प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर की समितियों में भी फेरबदल की सुगबुगाहट तेज हो चली है.. आगामी विधानसभा चुनाव के मदद्देनजर ये रणनीति अखिलेश यादव ने स्वयं तैयार की है.  इसके तहत कोशिश रहेगी कि जातियों के समीकरण के सही तरीके से बैठाया जाए औऱ सभी जातियों के नेताओं को संगठन में मौका दिया जाए…


मकरसंक्रांति के बाद होंगे बड़े बदलाव
अब ये तय माना जा रहा है कि मकर संक्रांति के बाद संगठन में बदलाव साफ तौर पर दिखाई देंगे, जिनका असर आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के सात सात पंचायत चुनाव पर भी देखने को मिलेगा.विधानसभा चुनाव को देखते हुए अखिलेश यादव ने टिकट वितरण की रणनीति पर ज्यादा फोकस किया गया है.

पार्टी का जनाधार मजबूत करने पर जोर

पार्टी सूत्रों के मुताबिक सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव संगठन को जमीनी स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ताओं को लेकर ज्यादा सजग दिखाई दे रहे हैं सभी वर्गों और जातियों के नेताओं को संगठन में प्रतिनिधित्व देने की योजना बनाई जा रही है, ताकि पार्टी का जनाधार मजबूत हो सके. कहा तो ये भी जा रहा है कि सपा  ने टिकट फाइनल करने का काम शुरू कर दिया है. एक-तिहाई से ज्यादा विधानसभा क्षेत्रों में उन नेताओं को वोटर लिस्ट के (एसआईआर) समेत सभी तैयारियों करने के निर्देश दे दिए गए हैं, जिन्हें आगामी चुनाव में टिकट दिया जाना है. ताकि, टिकट पाने वालों को तैयारी के लिए ज्यादा समय मिल सके और वे बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत कर सकें. जिन जिलाध्यक्षों और पदाधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है उन पर भी नजर रखी जा रही है पार्टी के कार्यक्रमों और एसआईआर में जो कार्यकर्ता अपेक्षित नहीं रहे है, उन्हें हटाने पर भी विचार किया जा रहा है. तो ये तय है कि मकर संक्रांति के बाद पार्टी में भारी उथल पुथल मचने वाली है

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