23 June 2026:
Madhya Pradesh/ Bhopal/
मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता यानी UCC पर चर्चा तेज हो गई है। कल सोमवार को मध्य प्रदेश सरकार द्वारा उच्च स्तरीय समिति गठित की गई। जिसमें भोपाल स्थित प्रशासन अकादमी में सुबह 10:30 बजे से सुनवाई की गई।
इस समिति का यह प्रयास है कि 30 जून तक विधेयक का प्रारूप तैयार हो जाए । जिससे 20 जुलाई से शुरू हो रहे विधानसभा के मानसून सत्र में इसे प्रस्तुत किया जा सके। सरकार मानसून सत्र में बिल भी ला सकती है।
इस समिति की अध्यक्षता उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह ने की। जहां शिक्षा विद गोपाल शर्मा, डॉक्टर शोभा पैठणकर, वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप नायर और समाजसेवी बुद्ध पाल सिंह ने सुझाव सुने।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने UCC लागू करने हेतु लोगों से मांगे सुझाव:
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा UCC को लेकर समिति बनाई गई है और यह समिति धार्मिक लोगों से अपनी राय ले रही है। क्योंकि समाज में धार्मिक सामाजिक पारिवारिक रूप से भिन्न-भिन्न मत है। आज समाज में भिन्नता की आवश्यकता नहीं है। इसलिए हमें समान नागरिक संहिता की ओर बढ़ने की जरूरत है। वर्तमान में उत्तराखंड, गुजरात और असम ने समान नागरिक संहिता को अपना लिया है और हमें भी अपने मध्य प्रदेश में इसे लागू करना है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के सेवा निवृत न्यायाधीश के नेतृत्व में अलग-अलग महत्वपूर्ण व्यक्तियों को लेकर एक समिति बनाई गई है यह समिति विभिन्न धर्मो के लोगों से विभिन्न जिलों में जाकर लोगों के सुझाव एकत्रित करेंगे। इस रिपोर्ट के आने के बाद मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार भी जन कल्याणकारी कार्यों में आगे बढ़ रही है। उन्होंने इस हेतु लोगों से अपने सुझाव देने हेतु आग्रह किया।
आदिवासी और लिव इन को कानूनी मान्यता देने संबंधी चर्चा:
इसमें आदिवासियों को UCC से बाहर रखना और लिव इन को कानूनी मान्यता देने संबंधी प्रावधान रखे जाने की बात भी सामने आई है।
आदिवासियों और लिव इन रिलेशनशिप के साथ विवाह की आयु को लेकर भी बात रखी गई है। विवाह की न्यूनतम आयु लड़के के लिए 24 और लड़की के लिए 21 वर्ष रखी गई है । भरण पोषण कानून में भी एकरूपता रखना चाहिए। हिंदू मुस्लिम और इसाई के लिए अलग-अलग कानून है। इसमें स्पष्टता होनी चाहिए।
आदिवासियों को लेकर भी नियम स्पष्ट होने चाहिए। क्योंकि आदिवासी अब पहले की तरह जंगलों में नहीं रहते ।अब वे भी समाज का एक हिस्सा है। कई आदिवासी भी सरकारी नौकरी में है और ऊंची जाति के बच्चों से विवाह कर रहे हैं।
अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य भगत सिंह नेताम ने कहा कि कई राज्यों ने UCC से अनुसूचित जनजातियों को बाहर रखा है यदि मध्य प्रदेश में भी इन्हें UCC में शामिल किया गया तो उनकी सांस्कृतिक प्रथाओं में व्यवधान उत्पन्न होगा । इसलिए आदिवासियों को UCC के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए।
लाइव इन रिलेशनशिप को लेकर धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने UCC में इसे मान्यता न देने हेतु सुझाव रखा है। हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने कहा है कि लाइव इन रिलेशनशिप को मानता नहीं दी जानी चाहिए।
शहर के काजी मुश्ताक अली ने लिव इन रिलेशनशिप को मान्यता देने का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने कहा यदि इसे UCC में शामिल किया जाता है तो सामाजिक ताना-बाना बिखर जाएगा।
लिव इन रिलेशनशिप में रजिस्ट्रेशन के लिए 30 दिन की शर्त रखने का प्रावधान हेतु चर्चा की जा रही है। रजिस्ट्रेशन होने पर विवाद की स्थितियां खत्म होगी। महिला और जन्म लिए गए बच्चे के लिए भरण पोषण का इंतजाम किया जा सकेगा। लिव इन रिलेशनशिप के बाद जो बच्चा पैदा होगा ,उसे सभी अधिकार प्राप्त होंगे। इससे पुरुषों को कानूनी राहत मिल सकेगी और लिव इन रिलेशनशिप टूटने के बाद शादी का झांसा देकर दुष्कर्म लगाने वाले आरोपों पर कमी आएगी।
मुस्लिम धर्म गुरुओं का पर्सनल लॉ पर विरोध:
जमीयत उलेमा ए हिंद मध्य प्रदेश के अध्यक्ष हाजी मोहम्मद हारुन का कहना है कि UCC में पर्सनल लॉ को टारगेट किया जा रहा है। जबकि पर्सनल लॉ कुरान और हदीस से चलता है । UCC में शराबबंदी और समान काम समान वेतन जैसी व्यवस्थाओं को लागू नहीं किया जा रहा है। पर्सनल डॉ को UCC में शामिल करने पर विरोध जताया।
भोपाल शहर के काजी सैयद मुश्ताक अली नदवी का कहना है कि पर्सनल लॉ को UCC में शामिल नहीं करना चाहिए । UCC में इसे शामिल करने से बड़ी मुश्किल हो जाएगी। एक अन्य सदस्य अतहर अहमद का कहना है यह हमारे अधिकार हैं इसे छीनकर UCC लाना ठीक नहीं है।


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