26 मई 2026
नई दिल्ली:
आम जनता की जेब पर भारी बोझ:
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक संकट का सीधा असर अब भारतीय आम उपभोक्ताओं की जेब पर दिखने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें भले ही सोमवार को 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गई हों, लेकिन घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बड़ी बढ़ोतरी कर दी गई है। इस बार पेट्रोल के दाम में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल के दाम में 2.71 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया गया है।
हैरानी की बात यह है कि 15 मई से लेकर अब तक, यानी पिछले महज 10 दिनों के भीतर ईंधन के खुदरा दामों में चौथी बार बढ़ोतरी की जा चुकी है। इन 10 दिनों में कुल मिलाकर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 7.50 रुपये प्रति लीटर तक की भारी बढ़ोतरी हो चुकी है। इस बढ़ोतरी के बाद देश के ज्यादातर शहरों में पेट्रोल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच गई है। अगर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की बात करें, तो यहाँ अब पेट्रोल 114.54 रुपये प्रति लीटर, डीजल 99.64 रुपये प्रति लीटर और सीएनजी 88.25 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच गया है।
सरकार उठा रही है एक लाख करोड़ का नुकसान
इस बीच केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मुंबई से आ रहे इन आंकड़ों और हालातों पर बड़ा बयान दिया है। वित्त मंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया का यह संकट सिर्फ एक भू-राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि इससे सीधे तौर पर आम लोगों के लिए ईंधन महंगा हो रहा है। सरकार इस समय डीजल और पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) में कटौती करके करीब एक लाख करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान खुद उठा रही है। उन्होंने साफ किया कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण ईंधन के साथ-साथ खाद (उर्वरक) की कीमतें भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अकल्पनीय रूप से बढ़ गई हैं। ऐसे मुश्किल समय में सरकार का पूरा ध्यान ईंधन, खाद और विदेशी मुद्रा (फॉरेन एक्सचेंज) के सही प्रबंधन पर है।
एक्सपर्ट्स का मानना है, अभी और बढ़ सकते हैं दाम
आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक, पेट्रोल और डीजल के दामों में जो बढ़ोतरी हुई है, उससे खुदरा महंगाई दर में 0.25 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी होने की पूरी आशंका है। जानकारों का यह भी कहना है कि आने वाले दिनों में आम जनता को कोई राहत मिलने की उम्मीद कम ही है, क्योंकि पेट्रोल और डीजल के खुदरा दामों में अभी और इजाफा होने से इनकार नहीं किया जा सकता।
राज्यों के पास है राहत देने का मौका
इस स्थिति को देखते हुए जानकारों का कहना है कि अब गेंद राज्य सरकारों के पाले में है। कई राज्यों में पेट्रोल और डीजल पर 30 प्रतिशत से भी अधिक वैट (वैट टैक्स) वसूला जाता है। अगर राज्य सरकारें चाहें तो इस वैट में थोड़ी कटौती करके आम उपभोक्ताओं को महंगाई के इस दौर में बड़ी राहत दे सकती हैं। लेकिन फिलहाल लगातार बढ़ते दाम लोगों के बजट को पूरी तरह बिगाड़ रहे हैं।


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