2 अप्रैल 2026
नई दिल्ली:
संसद के गलियारों में एक बार फिर ‘विदेशी चंदा (विनियमन) संशोधन विधेयक’ यानी FCRA Amendment Bill को लेकर घमासान छिड़ गया है। बुधवार को लोकसभा में इस बिल को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई, जिसके चलते सदन की कार्यवाही में भारी व्यवधान पड़ा।
क्यों हो रहा है विरोध?
विपक्षी दलों—कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और वामदलों—ने एकजुट होकर इस बिल का विरोध किया है। विपक्ष का मुख्य आरोप है कि:
यह विधेयक कथित तौर पर ईसाई समुदायों, अल्पसंख्यकों और उन एनजीओ (NGOs) के खिलाफ है जो जमीन पर अच्छा काम कर रहे हैं।
विपक्षी सांसदों का कहना है कि सरकार इस कानून के जरिए उन संस्थाओं को डराना चाहती है जो उनकी नीतियों से सहमत नहीं हैं।
सदन में जबरदस्त ड्रामा
जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सांसद बैनर लेकर वेल में पहुँच गए और नारेबाजी शुरू कर दी। हंगामे का आलम यह था कि स्पीकर ओम बिरला को केवल पांच मिनट के भीतर ही सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। विपक्ष के भारी विरोध को देखते हुए फिलहाल इस बिल को लोकसभा में पेश नहीं किया जा सका है।
सरकार का पक्ष: “राष्ट्र हित सर्वोपरि”
हंगामे के बीच संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सरकार का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि:
इस विधेयक का उद्देश्य किसी धर्म या समुदाय को निशाना बनाना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करना है।
सरकार चाहती है कि विदेशी फंड का दुरुपयोग देश विरोधी गतिविधियों, गलत सूचना फैलाने या अवैध प्रदर्शनों में न हो।
सरकार का तर्क है कि विदेशी चंदे के लेन-देन में पारदर्शिता होनी चाहिए ताकि विदेशी धन का उपयोग राष्ट्र के खिलाफ न किया जा सके।
विपक्ष के कड़े रुख के कारण फिलहाल यह विधेयक टल गया है। हालांकि, सरकार ने साफ कर दिया है कि वह इसे चर्चा के लिए लाएगी। किरेन रिजिजू ने विपक्षी सांसदों से अपील की है कि वे बिल के प्रावधानों को समझें और इसे केवल राजनीतिक चश्मे से न देखें।


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