30 अप्रैल 2026
इंदौर:
महाराष्ट्र और देश के अन्य हिस्सों में हाल ही में हुई कुछ हिंसक घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। मुंबई में जुबेर अंसारी द्वारा कथित रूप से धर्म पूछकर दो लोगों पर चाकू से हमला करने की घटना ने सबको चौंका दिया है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ये केवल छिटपुट आपराधिक घटनाएं नहीं हैं, बल्कि यह ‘लोन वुल्फ’ (अकेले दम पर हमला करने वाला) हमलों का एक उभरता हुआ खतरनाक पैटर्न है।
क्या है ‘लोन वुल्फ’ हमला और यह क्यों है खतरनाक?
‘लोन वुल्फ’ उस हमलावर को कहा जाता है जो किसी आतंकी संगठन से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ नहीं दिखता और अकेले ही वारदात को अंजाम देता है।
भले ही हमलावर अकेला हो, लेकिन वह इंटरनेट पर मौजूद कट्टरपंथी कंटेंट और वैचारिक प्रशिक्षण से प्रभावित होता है।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, वॉट्सऐप, टेलीग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर ‘हम बनाम वे’ की सोच को बढ़ावा दिया जा रहा है।
इंटरनेट पर एल्गोरिदम यूजर को वही कंटेंट दिखाते हैं जिसे वे देखना चाहते हैं। इससे व्यक्ति केवल एक ही विचारधारा के घेरे में कैद हो जाता है और उसे ही सच मानने लगता है।
सुरक्षा एजेंसियों की नई रणनीति
सुरक्षा एजेंसियां अब इन घटनाओं को महज व्यक्तिगत हिंसा मानकर खारिज करने के पक्ष में नहीं हैं।
ऑपरेशन पिजन: कट्टरपंथ से निपटने के लिए एटीएस (ATS) जैसी इकाइयां ‘डी-रैडिकलाइजेशन’ प्रोग्राम चला रही हैं।
तकनीकी निगरानी:फर्जी अकाउंट, वीपीएन (VPN) और डीपफेक के जरिए नफरत फैलाने वालों पर नजर रखी जा रही है।
स्थानीय स्तर पर सतर्कता: दक्षिण और पश्चिम भारत में स्थानीय भाषाओं में हो रहे कट्टरपंथी प्रचार को रोकने के लिए सरकार ने विशेष रणनीति तैयार की है।
कट्टरपंथ: अब एक वैश्विक समस्या
यह समस्या सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अपनी छात्रवृत्ति नीति में बड़ा बदलाव करते हुए उन संस्थानों को बाहर कर दिया है जहाँ इस्लामिक कट्टरपंथ का प्रभाव देखा गया। यह कदम दिखाता है कि दुनिया भर में कट्टरपंथ अब शिक्षा, समाज और राजनीति के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है।
महाराष्ट्र में बढ़ते खतरे के कारण
विशेषज्ञों ने महाराष्ट्र में इस बढ़ते खतरे के पीछे कुछ प्रमुख कारण बताए हैं:
तेज शहरीकरण और सामाजिक असंतुलन।
स्थानीय घटनाओं का बहुत जल्दी सांप्रदायिक रंग ले लेना।
इंटरनेट की व्यापक पहुंच और बाहरी वैचारिक प्रभाव।
मुंबई और नासिक की घटनाएं सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि एक गहरे सामाजिक संकट की चेतावनी हैं। हालांकि भारत का समाज काफी हद तक मध्यमार्गी है, लेकिन युवाओं को इस डिजिटल कट्टरपंथ से बचाना अब सरकार और समाज दोनों के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गया है।


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