8 मई 2026
नई दिल्ली:
देश की स्कूली शिक्षा प्रणाली को लेकर नीति आयोग की एक चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो दशकों में सरकारी स्कूलों में बच्चों के दाखिले (एनरोलमेंट) में करीब 22 प्रतिशत की कमी आई है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि अभिभावकों का भरोसा अब सरकारी तंत्र से कम होकर निजी स्कूलों की ओर बढ़ रहा है।
आंकड़ों की जुबानी
रिपोर्ट के अनुसार, साल 2005 में सरकारी स्कूलों में दाखिले का स्तर 71 प्रतिशत था, जो अब साल 2024-25 में घटकर मात्र 49.24 प्रतिशत रह गया है। यानी अब आधे से भी कम बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे हैं। इसके विपरीत, प्राइवेट स्कूलों की तरफ रुझान तेजी से बढ़ा है।
प्राइवेट स्कूलों की तरफ क्यों भाग रहे हैं लोग?
नीति आयोग ने इसके पीछे कुछ प्रमुख कारण बताए हैं:
अंग्रेजी माध्यम: अभिभावकों को लगता है कि प्राइवेट स्कूलों में अंग्रेजी बेहतर तरीके से सिखाई जाती है, जो भविष्य में नौकरी के लिए जरूरी है।
अनुशासन और माहौल: निजी स्कूलों में अनुशासन और बेहतर सुविधाओं की उम्मीद भी एक बड़ा कारण है।
बुनियादी ढांचा: रिपोर्ट कहती है कि कई सरकारी स्कूलों में खेल के मैदान, शौचालय और पीने के साफ पानी जैसी सुविधाओं की कमी है।
पढ़ाई के स्तर पर सवाल
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि बुनियादी शिक्षा का स्तर काफी कमजोर है। पांचवीं कक्षा के करीब 35 प्रतिशत छात्र ऐसे हैं जो अपनी कक्षा की किताब भी ठीक से नहीं पढ़ पा रहे हैं। वहीं, करीब 60 प्रतिशत छात्र बुनियादी गणित के सवालों को हल करने में असमर्थ हैं। आयोग का कहना है कि सिर्फ स्कूल खोलना काफी नहीं है, बल्कि पढ़ाई की गुणवत्ता और शिक्षकों की जवाबदेही तय करना भी जरूरी है।


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