12 June 2026
पश्चिम एशिया के समुद्री इलाके में हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। पिछले चार दिनों के भीतर अमेरिकी सेना ने ओमान के तट के पास तीन कमर्शियल (वाणिज्यिक) जहाजों पर ताबड़तोड़ हमले किए हैं। इन हमलों में तीन भारतीय नाविकों की दर्दनाक मौत हो गई है, जबकि जहाजों पर सवार अन्य भारतीय नाविकों को बचाने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ा है। गनीमत यह रही कि इन जहाजों पर कोई भारतीय चालक दल का सदस्य (कैप्टन या मुख्य ऑपरेटर) सवार नहीं था।
भारत सरकार ने इस पूरे घटनाक्रम पर बेहद सख्त रुख अपनाया है। नई दिल्ली ने इस मामले पर अपनी गहरी नाराजगी जताते हुए साफ कहा है कि कमर्शियल जहाजों पर हो रहे ये हमले तुरंत बंद होने चाहिए।
कब और कैसे हुए अमेरिकी हमले?
अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेना द्वारा लगातार तीन बड़े हमलों को अंजाम दिया गया:
8 जून 2026: पहला हमला ‘एमटी मैरीवेक्स’ नामक जहाज पर हुआ, जिसमें अमेरिकी हमले के बाद भी 24 भारतीय नाविक पूरी तरह सुरक्षित बच गए।
9 जून 2026: दूसरा और सबसे घातक हमला ‘एमटी सेंटेबेलो’ जहाज पर किया गया। इस अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की जान चली गई, जबकि 21 भारतीयों समेत कुल 25 अन्य क्रू मेंबर्स को जैसे-तैसे बचाया गया।
11 जून 2026: तीसरा हमला ‘एमटी जलदीपे’ नामक जहाज पर हुआ, जहां खुशकिस्मती से सभी 21 भारतीय नाविक सुरक्षित बच निकलने में कामयाब रहे।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि अमेरिका ने जिन तीन जहाजों को निशाना बनाया है, उनमें से दो जहाज पलाऊ के झंडे (पंजीकृत) वाले थे, जबकि एक जहाज गिनी-बिसाऊ देश के झंडे के साथ चल रहा था। इन दोनों ही देशों पर अमेरिकी प्रतिबंध (ओएफएसी) लागू हैं।
‘एमटी सेंटेबेलो’ पर हमले में यूपी-बिहार के नाविकों की मौत
अमेरिकी जेट विमानों ने जब ‘एमटी सेंटेबेलो’ जहाज को निशाना बनाया, तो उसके इंजन रूम पर दो हेलफायर मिसाइलें दागी गईं। इससे जहाज के अगले हिस्से में भयंकर आग लग गई। इस हमले में जिन तीन भारतीय नाविकों की मौत हुई है, उनकी पहचान हो गई है:
- हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर के रहने वाले डेक कैडेट आदित्य शर्मा
- उत्तर प्रदेश के देवरिया के रहने वाले चीफ इंजीनियर शिवानंद चौरसिया
- आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम के रहने वाले पटनाला सुरेश
इस हमले के बाद ओमान के अधिकारियों और ओमान में मौजूद भारतीय चालक दल ने सूझबूझ दिखाते हुए जहाज पर सवार बाकी 20 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचा लिया।
भारत ने अमेरिकी दूतावास के प्रभारी को किया तलब, संयुक्त राष्ट्र में उठाया मुद्दा
इस गंभीर घटना के बाद भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास के कार्यकारी राजदूत (चार्ज डी’अफेयर्स यानी सीडीए) जेसन मॉक्स को तुरंत तलब किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को एक कड़ा बयान जारी करते हुए कहा कि हमने अमेरिकी प्रशासन के सामने अपनी गहरी नाराजगी और चिंता दर्ज कराई है। हमारा दृढ़ विश्वास है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री समुदाय की भलाई और सुरक्षा सर्वोपरि है।
भारत ने इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र (UN) में भी उठाया है और पश्चिम एशिया संकट के दौरान कमर्शियल जहाजों पर हो रहे इन हमलों का कड़ा विरोध किया है। सरकार ने सभी जहाज मालिकों और नाविकों को इस रूट पर बेहद सतर्क रहने की सलाह दी है।
अमेरिकी सेना और दूतावास में तालमेल की कमी?
इस पूरे मामले में एक बेहद हैरान करने वाली बात भी सामने आई है। अमेरिकी सेना की कार्रवाई और उनके ही दूतावास के बयानों में भारी अंतर देखने को मिल रहा है। अमेरिकी सेना की ओर से कहा गया है कि कमर्शियल जहाजों पर ये हमले बंद हो जाने चाहिए, क्योंकि यह समुद्री क्षेत्र में कानून व्यवस्था के खिलाफ है।
लेकिन जब अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) स्वतंत्र तरीके से अपनी कार्रवाई कर रहा है, तो उस पर अमेरिकी दूतावास की कोई पकड़ या नियंत्रण नजर नहीं आ रहा है। अमेरिकी दूतावास का कहना है कि उनकी इस सैन्य कार्रवाई पर कोई सीधी पहुंच या कंट्रोल नहीं है, जिसने इस पूरे विवाद को और ज्यादा उलझा दिया है।


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