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27 मई 2026

नई दिल्ली:

ईरान के नियंत्रण वाले इलाकों में गूंजे धमाके, अमेरिका ने कहा- आत्मरक्षा में की कार्रवाई, दुनिया भर में तेल संकट और क्षेत्रीय युद्ध का मंडराया खतरा।
मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के उन सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर ताबड़तोड़ मिसाइलें बरसाई हैं, जहां से ईरान होर्मुज स्ट्रेट को नियंत्रित करता है। इस हमले के बाद बंदर अब्बास और केशम द्वीप के आसपास के इलाकों में भीषण विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। अमेरिकी सेना का दावा है कि यह कार्रवाई उन्होंने आत्मरक्षा में की है, क्योंकि ईरानी बलों ने अमेरिकी नौसेना के जहाजों पर मिसाइलों, ड्रोन और छोटी नावों से हमला किया था। जवाब में अमेरिका ने ईरान की मिसाइल साइटों, नावों और माइन्स बिछाने वाले जहाजों को पूरी तरह नष्ट कर दिया है।

तनाव की शुरुआत और अब तक का घटनाक्रम
इस पूरे विवाद की जड़ें साल 2026 की शुरुआत से जुड़ी हैं, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के परमाणु केंद्रों और कमांड सिस्टम पर बड़े हमले किए थे। इसके जवाब में ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया था, जिससे वैश्विक शिपिंग पूरी तरह ठप हो गई थी और तेल की कीमतें आसमान छूने लगी थीं। इसके बाद पाकिस्तान की मध्यस्थता से सीजफायर तो हो गया, लेकिन दोनों देशों के बीच का तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। अमेरिका इस समय वहां ऑपरेशन एपिक फ्यूरी चला रहा है और उसके डिस्ट्रॉयर लगातार व्यापारिक जहाजों को एस्कॉर्ट कर रहे हैं।
आखिर क्यों हो रही है होर्मुज पर लड़ाई?
होर्मुज जलमार्ग ईरान के लिए उसकी सबसे बड़ी ताकत और संप्रभुता का मुद्दा है, जिसे वह ओमान के साथ मिलकर संभालता है। ईरान इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर नियंत्रण और टोल वसूलने के लिए नई अथॉरिटी बना रहा है। दूसरी तरफ, अमेरिका का कहना है कि वह इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग को हर हाल में खुला रखना चाहता है ताकि दुनिया भर का तेल और गैस व्यापार बिना किसी रुकावट के चलता रहे। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन का मानना है कि ईरान इस जलमार्ग का इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग के लिए नहीं कर सकता।
दुनिया की अर्थव्यवस्था और भारत पर असर
इस ताजा टकराव का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर दिख रहा है और कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। भारत जैसे भारी मात्रा में तेल आयात करने वाले देशों के लिए यह बड़ी चिंता की बात है क्योंकि हमारे तेल का एक बड़ा हिस्सा इसी खाड़ी क्षेत्र से आता है। इस तनाव की वजह से शिपिंग कंपनियों को अपने रूट बदलने पड़ रहे हैं, जिससे इंश्योरेंस कॉस्ट बढ़ गई है।
क्षेत्रीय युद्ध का बड़ा खतरा
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही दोनों देश पूरी ताकत से पूर्ण युद्ध नहीं चाहते, लेकिन इस तरह के छोटे-मोटे टकराव किसी बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकते हैं। ईरान के पास स्पीड बोट्स, एंटी-शिप मिसाइल और माइन्स का बड़ा जखीरा है, जिससे वह खाड़ी में मुश्किलें खड़ी कर सकता है। अगर यह तनाव और बढ़ा तो न केवल ईरान की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचेगा, बल्कि पूरी दुनिया की आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है। फिलहाल वैश्विक नेताओं की ओर से दोनों देशों से शांति बनाए रखने की अपील की जा रही है।


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