अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी वि.वि. विवादित भर्ती मामला : 13 असिस्टेंट प्रोफेसर स्थायी होंगे

khabar pradhan

संवाददाता

21 February 2026

अपडेटेड: 2:09 PM 0stGMT+0530

कार्य परिषद की बैठक में विवादित भर्ती पर अहम निर्णय
भोपाल स्थित अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय में विवादित असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती को लेकर कार्य परिषद ने महत्वपूर्ण फैसला लिया है। बैठक में 13 असिस्टेंट प्रोफेसरों की परिवीक्षा अवधि समाप्त कर उन्हें स्थायी करने पर सहमति बनी है। हालांकि स्थायीकरण के औपचारिक आदेश बाद में  शर्तों के साथ जारी किए जाएंगे।

कोर्ट के फैसले के आधार पर आगे की कार्रवाई संभव
विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि संरक्षित व्यवस्था के तहत हुई इस भर्ती को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। ऐसे में न्यायालय का जो भी फैसला आएगा, उसके अनुसार भविष्य की कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल विश्वविद्यालय ने चयनित अभ्यर्थियों को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ाने का संकेत दिया है।

दत्तोंपंत ठेंगङी शोध संस्थान में हुई बैठक
यह बैठक दत्तोंपंत ठेंगङी शोध संस्थान में आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता कुलगुरु प्रोफेसर डॉ. हिंडोलिया ने की। बैठक में रजिस्ट्रार शैलेंद्र कुमार जैन सहित कार्य परिषद के अन्य सदस्य भी उपस्थित रहे और भर्ती से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा की गई।

पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया जल्द शुरू करने की तैयारी
बैठक में यह भी तय किया गया कि विश्वविद्यालय जल्द ही पीएचडी में प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर सकता है। विश्वविद्यालय में 12 विषयों में लगभग 48 सीटों पर प्रवेश दिए जाने की तैयारी है, जिससे शोध गतिविधियों को गति मिलेगी।

सोशल साइंस संकाय को नया प्रभार, प्रस्ताव को मंजूरी
विश्वविद्यालय ने प्रतिनियुक्ति पर आए राजनीति शास्त्र के प्रोफेसर डॉ. एल.जी. झरिया को सोशल साइंस संकाय के डीन का अतिरिक्त प्रभार देने का प्रस्ताव रखा था। इस प्रस्ताव को भी कार्य परिषद ने मंजूरी दे दी है।

असिस्टेंट रजिस्ट्रार भी बन सकेंगे रिसर्च गाइड
यूजीसी के नियमों के अनुसार असिस्टेंट रजिस्ट्रार को भी पीएचडी शोधार्थियों का मार्गदर्शन करने का अवसर दिया जा सकेगा। इसी आधार पर उन्हें रिसर्च गाइड बनाने की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है, जिससे शोध की गुणवत्ता और संख्या दोनों बढ़ेंगी।

भर्ती प्रक्रिया पर उठे थे कई सवाल
दरअसल वर्ष 2022 में निकली भर्ती को लेकर हाईकोर्ट में आरटीआई कार्यकर्ता डॉ. डीपी सिंह ने याचिका दायर की है। आरोप है कि विश्वविद्यालय ने विषयवार रोस्टर तैयार करने के बजाय एकल रोस्टर बनाया, जबकि सभी विषयों को वर्णानुक्रम में शामिल कर रोस्टर तैयार किया जाना चाहिए था।

आरक्षण नियमों के पालन पर भी विवाद
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ विषय रोस्टर में शामिल नहीं हो पाए। साथ ही दिव्यांगजनों के लिए 6 प्रतिशत आरक्षण और महिला आरक्षण के तहत पद चिन्हित नहीं किए गए। इसी कारण भर्ती प्रक्रिया विवादों में घिरी हुई है और अब सभी की नजर कोर्ट के फैसले पर टिकी है।

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