2.37 लाख करोड़ के साथ नया रिकॉर्ड, सरकार की आय में बढ़ोतरी
भारत में अप्रैल 2025 में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस महीने जीएसटी संग्रह 12.6% की सालाना वृद्धि के साथ 2.37 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद से सबसे अधिक मासिक संग्रह है। यह आंकड़ा पिछले उच्चतम स्तर 2.10 लाख करोड़ रुपये को भी पार कर गया है। इस वृद्धि में घरेलू लेनदेन से जीएसटी राजस्व में 10.7% और आयात से प्राप्त राजस्व में 15.8% की बढ़ोतरी का योगदान रहा। कुल संग्रह में सेंट्रल जीएसटी 45,473 करोड़ रुपये, स्टेट जीएसटी 57,374 करोड़ रुपये, इंटीग्रेटेड जीएसटी 1,13,205 करोड़ रुपये और सेस 21,147 करोड़ रुपये शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मजबूत संग्रह अर्थव्यवस्था में सुधार और बेहतर कर अनुपालन को दर्शाता है। हालांकि, इस दौरान जारी किए गए रिफंड में भी 38.8% की वृद्धि हुई, जो 25,104 करोड़ रुपये तक पहुंचा। नेट जीएसटी राजस्व 2.12 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 11.6% अधिक है। यह उपलब्धि सरकार के लिए बड़ी राहत की बात है, क्योंकि इससे राजकोषीय स्थिति मजबूत होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि जीएसटी प्रणाली में सुधार, जैसे ई-इनवॉइसिंग और सख्त अनुपालन उपाय, ने इस वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। साथ ही, उपभोक्ता मांग में वृद्धि और औद्योगिक गतिविधियों में तेजी ने भी राजस्व को बढ़ावा दिया। हालांकि, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि भविष्य में कर दरों और स्लैब में बदलाव की जरूरत हो सकती है ताकि यह प्रणाली और प्रभावी हो सके। यह रिकॉर्ड-तोड़ संग्रह सरकार के लिए आर्थिक स्थिरता और विकास योजनाओं को लागू करने में सहायक सिद्ध होगा। भविष्य में इस स्तर को बनाए रखना सरकार के लिए एक चुनौती होगी।


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