अब ‘केरलम’ होगा केरल का नाम: केंद्रीय कैबिनेट में मंजूरी
संवाददाता
25 February 2026
अपडेटेड: 11:59 AM 0thGMT+0530
नाम बदलने की प्रक्रिया शुरू
नई दिल्ली में केंद्रीय कैबिनेट की पहली बैठक में राज्य के नाम को लेकर अहम निर्णय लिया गया है। सरकार ने केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यह जानकारी दी l यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया, जिसे सरकार के नए कार्यकाल की शुरुआती अहम पहल माना जा रहा है।
राज्य सरकार की मांग को मिली स्वीकृति
यह प्रस्ताव केरल विधानसभा की ओर से भेजा गया था, जिसमें कहा गया था कि राज्य का पारंपरिक और भाषाई नाम ‘केरलम’ है, जो मलयालम भाषा में प्रचलित है। विधानसभा ने 2023 और 2024 में इस संबंध में प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजा था। राज्य सरकार का तर्क है कि यह बदलाव सांस्कृतिक पहचान और स्थानीय परंपराओं के अनुरूप होगा।
संविधान के तहत आगे बढ़ेगी प्रक्रिया
केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद अब यह प्रस्ताव संवैधानिक प्रक्रिया से गुजरेगा। इसके लिए संसद में विधेयक लाया जाएगा, जिस पर दोनों सदनों की स्वीकृति आवश्यक होगी। इसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने पर राज्य का नाम आधिकारिक रूप से बदल जाएगा। संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत राज्यों के नाम बदलने की व्यवस्था पहले से मौजूद है।
नाम बदलने की तय प्रक्रिया में कई चरण
इस प्रक्रिया में सबसे पहले राज्य विधानसभा प्रस्ताव पास करती है, फिर गृह मंत्रालय इसकी समीक्षा करता है। इसके बाद केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिलती है और संसद में विधेयक लाया जाता है। संसद की मंजूरी के बाद राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलते ही नाम परिवर्तन लागू हो जाता है। इसी क्रम में अब केरल का नाम बदलने की दिशा में आगे की कार्रवाई होगी।
पहले भी बदल चुके हैं कई राज्यों के नाम
भारत में इससे पहले भी कई राज्यों के नाम बदले जा चुके हैं, जैसे संयुक्त प्रांत का उत्तर प्रदेश, मद्रास का तमिलनाडु, मैसूर का कर्नाटक, उड़ीसा का ओडिशा और उत्तरांचल का उत्तराखंड। इन बदलावों का उद्देश्य स्थानीय भाषा, संस्कृति और पहचान को मजबूत करना रहा है।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया भी तेज
इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। कुछ नेताओं ने इस बदलाव को सांस्कृतिक सम्मान बताया है, जबकि कुछ ने नाम बदलने की प्राथमिकता पर सवाल उठाए हैं। वहीं राज्य के कई नागरिकों का मानना है कि इससे उनकी भाषाई पहचान को मजबूती मिलेगी।