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16 जून 2026 : मंगलवार:
अमेरिका और ईरान का युद्ध आखिरकार 107 दिन के बाद समाप्त हो गया है।  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, राष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के संसद के स्पीकर मोहम्मद कालिबाफ ने युद्ध विराम डील पर डिजिटल साइन किए हैं।

19 जून को जिनेवा में एक औपचारिक कार्यक्रम में एमओयू पर हस्ताक्षर करेंगे। इसके लिए दोनों पक्ष आपस में बातचीत करेंगे और करीब 60 दिन में एक समझौता के तहत अंतिम फैसला होगा ‌ । इसमें ट्रंप ने यह दावा किया है कि ईरान होर्मुज स्ट्रीट को खोलेगा और इसके लिए वह कोई टोल वसूली नहीं लेगा।
ट्रंप ने कहा है कि देश के सभी जहाज अपने इंजनों को शुरू कर लें और तेल का व्यापार फिर से बिना किसी बाधा के शुरू हो सकेगा।

अमेरिका ने ईरान को युद्ध खत्म करने और उसके परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करने के लिए एक डील के  14 पॉइंट की शर्तें रखी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान समझौता करना चाहता है। यह प्रस्ताव मध्यस्थों के माध्यम भेजा गया है। इसमें लड़ाई रोकने, ईरान की परमाणु गतिविधियों पर रोक लगाने और क्षेत्र में नया रूप देने के लिए एक व्यापक रूपरेखा तैयार की गई है। यह जानकारी द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अधिकारियों के हवाले से दी है।
प्लान में कहा गया है कि ईरान अपने तीन प्रमुख परमाणु ठिकानों को बंद करे, अपने देश में यूरेनियम संवर्धन पर पूरी तरह रोक लगाये और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को भी  बंद कर दे।

इसके अलावा , ईरान द्वारा प्रॉक्सी समूहों को दी जा रही मदद पर भी रोक लगाने के साथ होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोलने के लिए शर्तें रखी गई है।
इस डील में एक महीने के लिए युद्ध विराम का प्रस्ताव भी शामिल है। इस डील में  ईरान से यह वादा करने को कहा गया है कि वह कभी परमाणु हथियार  बनाने की कोशिश नहीं करेगा। साथ ही, उसे अपने पास मौजूद संवर्धित परमाणु सामग्री को तय समय के भीतर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी को सौंपना होगा।
साथ ही यह भी कहा गया है कि वह अपने सहयोगी समूहों को समर्थन धन या हथियार देना बंद करे। इसके अलावा, होर्मुज स्ट्रेट को अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ते के रूप में खुला रखने की बात भी शामिल है। मिसाइल कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर चर्चा बाद में करने की बात कही गई है, जिसमें मिसाइलों की संख्या और उनकी मारक क्षमता पर सीमा तय की जा सकती है।
साथ ही, ईरान की सैन्य ताकत को केवल आत्मरक्षा तक सीमित रखने का प्रस्ताव भी है।

ईरान अमेरिकी प्रतिबंधों से होगा मुक्त:
इस डील में ईरान पर लगे सभी परमाणु से जुड़े प्रतिबंध हटाने की बात कही गई है। अमेरिका, बुशहर में एक नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के विकास में मदद करने को भी तैयार है, जिससे बिजली बनाई जा सकेगी, लेकिन इस पर निगरानी रखी जाएगी।
इस प्रस्ताव में “स्नैपबैक” सिस्टम को समाप्त करने का प्रावधान भी शामिल है, जो प्रतिबंधों को स्वचालित रूप से फिर से लागू करने की अनुमति देता है। ऐसा देखा जा रहा है यह योजना काफी हद तक ट्रंप सरकार की पहले की मांगों जैसी है, जो 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने से पहले रखी गई थीं।

इस डील में तुर्की और  मिस्र  शामिल:
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह योजना बिचौलियों के जरिए पहुंचाई गई है। इस में पाकिस्तान एक अहम कड़ी बनकर उभरा है, साथ ही तुर्की और मिस्र भी इसमें शामिल हैं, जो अमेरिका और ईरान के अधिकारियों के बीच बातचीत करवाने की कोशिश कर रहे हैं।
हालांकि, बातचीत की कोशिशों के बावजूद दोनों पक्षों के बीच अभी भी बड़ा अंतर है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने इजरायल, कुवैत, बहरीन और सऊदी अरब समेत कई जगहों पर हमले जारी रखे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने यह उम्मीद जताई कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, “वे समझौता करना चाहते हैं और उन्होंने कहा है कि वे कभी परमाणु हथियार नहीं बनाएंगे।” ट्रंप ने कहा है कि बातचीत जारी है और अभी ईरान के बड़े नेताओं से संपर्क किया जा रहा है, जो समझौता करना चाहते हैं। यह समझौते की कूटनीतिक कोशिश ऐसे समय में हो रही है जब युद्ध चौथे हफ्ते में पहुंच चुका है और सैन्य कार्रवाई तथा आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।

भारत के लिए कैसे होगा फायदा:
भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल आयात करता है क्रूड ऑयल सस्ता होगा तो आयात बिल घटेगा चालू खाता सुधरेगा और महंगाई काबू करने में मदद मिल सकेगी महंगाई कम होने से ब्याज दरों में कटौती का रास्ता खुलेगा जिसे लोन भी सकते होंगे।
भारत की करीब 55 प्रतिशत तेल और 90% एलजी की सप्लाई और मुझसे ही होती है अब इस डील के बाद हार्मोन से गुजरने वाला पहला गैस टैंकर दिशा रहा कतर से टैंकर भारत पहुंचेगी।
खाड़ी देशों में 90 लाख भारतीय रहते हैं।भारत को आने वाले रेमिटेंस 55 अरब डॉलर खाड़ी देशों से आता है और यह कुल रेमिटेंस का लगभग 40% है। खाड़ी देशों को कृषि और खाद्य निर्यात भारत का 11.8 अरब डॉलर का है इसमें से यूएई और सऊदी अरब को सर्वाधिक निर्यात किया जाता है बासमती चावल के लिए और अन्य कई फल कृषि की अर्थव्यवस्था को संभल देंगे।
पीएम मोदी ने किया इस डील का स्वागत:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका ईरान जंग खत्म करने पर सहमति का स्वागत किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि इस जंग से दुनिया भर में गंभीर आर्थिक परेशानियां पैदा हुई है। अब इस सहमति के लागू होने से इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल होगी।  समुद्री मार्ग से जहाजों की आवाजाही सामान्य रूप से हो सकेगी।


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