30 मई 2026
नई दिल्ली:
नई दिल्ली से आ रही मौसम की एक बड़ी खबर ने देश की चिंता बढ़ा दी है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग यानी आईएमडी (IMD) ने इस साल के मानसून को लेकर एक नया और थोड़ा परेशान करने वाला अनुमान जारी किया है। मौसम विभाग का कहना है कि इस साल देश में अल नीनो का असर देखने को मिल सकता है, जिसकी वजह से मानसून पिछले 11 सालों में सबसे कमजोर रहने की आशंका है।
मौसम विभाग ने अपने दूसरे अनुमान में बताया है कि इस बार जून से सितंबर के महीनों के दौरान देश में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। आईएमडी के मुताबिक, इस बार पूरे मानसून सीजन में दीर्घकालिक औसत (लॉन्ग पीरियड एवरेज) की केवल 90 प्रतिशत के बराबर ही बारिश होने की उम्मीद है। आपको बता दें कि इससे पहले जो अनुमान जारी किया गया था, उसमें बारिश के 92 प्रतिशत रहने की बात कही गई थी, लेकिन अब इसे घटाकर 90 प्रतिशत कर दिया गया है। अगर हम साल 1971 से 2020 तक के आंकड़ों को देखें, तो देश में मानसून की औसत बारिश 87 सेंटीमीटर मानी जाती है।
आखिर क्या है चिंता की वजह?
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रशांत महासागर में परिस्थितियां धीरे-धीरे बदल रही हैं और अल नीनो का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। यह असर जून के महीने में शुरू हो सकता है और सितंबर आते-आते काफी मजबूत हो सकता है। अल नीनो की इसी स्थिति के कारण मानसून की बारिश पर सीधा और बुरा असर पड़ता है, जिससे कई इलाकों में सूखे जैसे हालात भी बन सकते हैं। इससे पहले साल 2015 में भी अल नीनो का ऐसा ही भयंकर रूप देखा गया था, जब औसत बारिश घटकर सिर्फ 87 प्रतिशत रह गई थी।
खेती और जेब पर कैसे पड़ेगा असर?
मानसून के कमजोर रहने की खबर से सबसे ज्यादा चिंता कृषि क्षेत्र और बढ़ती महंगाई को लेकर है। भारत के कई राज्य जैसे मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा और तेलंगाना ऐसे हैं, जहाँ खरीफ की फसलों के लिए किसान पूरी तरह से मानसून की बारिश पर निर्भर रहते हैं।
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जुलाई और अगस्त के महीनों में भी बारिश कम रही, तो इसका सीधा असर फसलों के उत्पादन पर पड़ेगा। पानी की कमी के कारण जलाशयों (जैसे तालाब और डैम) का जलस्तर गिर जाएगा, जिससे आने वाले समय में खाने-पीने की चीजों की कमी हो सकती है। अगर ऐसा हुआ तो दाल, चावल और सब्जियों की कीमतों में भारी तेजी आ सकती है। पहले से ही बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं और ईंधन (पेट्रोल-डीजल) की महंगी कीमतों के बीच, कमजोर मानसून आम लोगों की जेब पर महंगाई का बोझ और ज्यादा बढ़ा सकता है।


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