18 June 2026:
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने रक्षा विनिर्माण और उत्पादन के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में देश का कुल रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये के सर्वकालिक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। यह देश के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा रक्षा उत्पादन का आंकड़ा है, जो भारत की बढ़ती सैन्य और औद्योगिक ताकत को साफ तौर पर दिखाता है।
एक दशक में चार गुना बढ़ा रक्षा उत्पादन
अगर वर्तमान उत्पादन की तुलना पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 से की जाए, तो देश के रक्षा उत्पादन में 15.6 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2020-21 में रक्षा उत्पादन जहां 84,643 करोड़ रुपये था, वहीं इसके मुकाबले वर्तमान उत्पादन में 110 प्रतिशत से ज्यादा का उछाल आया है। इतना ही नहीं, साल 2013-14 के 43,746 करोड़ रुपये के मुकाबले इसमें लगभग चार गुना की बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस ऐतिहासिक सफलता का पूरा श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रेरणादायी नेतृत्व को देते हुए सरकारी रक्षा उपक्रमों के साथ-साथ निजी क्षेत्र की कंपनियों के प्रयासों की भी जमकर सराहना की है।
निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़कर हुई 24 प्रतिशत, निर्यात में भी रिकॉर्ड वृद्धि
इस कुल रक्षा उत्पादन में जहां सरकारी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों की हिस्सेदारी लगभग 76 प्रतिशत रही, वहीं निजी क्षेत्र की कंपनियों ने भी अपनी स्थिति को काफी मजबूत किया है। रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र का योगदान अब बढ़कर 22 प्रतिशत से 24 प्रतिशत के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जो कि रकम के मामले में करीब 42 हजार करोड़ रुपये बनता है। निजी कंपनियों की यह सक्रियता देश के औद्योगिक आधार को और मजबूत कर रही है।
घरेलू विनिर्माण में हुई इस बढ़ोतरी का सीधा और सकारात्मक असर भारत के रक्षा निर्यात पर भी देखने को मिला है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत ने रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये का रक्षा निर्यात किया है। यह बड़ी कामयाबी प्रधानमंत्री मोदी के आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया अभियान की एक बहुत बड़ी वैश्विक सफलता को साबित करती है।


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