26 मई 2026:
मंगलवार
खबर प्रधान डेस्क :
भोपाल/ मध्यप्रदेश/
स्कूल शिक्षा विभाग ने आरटीई में पढ़ाई कर रहे बच्चों को सांदीपनी स्कूलों में एडमिशन देने से इंकार कर दिया। ये वे बच्चे हैं जिन्हें सरकारी खर्च पर आठ साल तक प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाई की। कक्षा नौंवी में एडमिशन न मिलने से साल खराब होने की नौबत आ गई है। आरटीई के तहत दाखिला बच्चों को सांदीपनी प्राइवेट स्कूल का माना है। प्राइवेट की महंगी फीस भरना अभिभावकों के सामने चुनौती बन गई है। इससे प्रदेश के करीब 50 हजार बच्चे प्रभावित हो रहे हैं।
प्रदेश में हर साल आरटीई के तहत एक लाख बच्चों का निजी स्कूलों में एडमिशन होता है। कक्षा आठवीं तक इनकी फीस सरकार जमा करती है। आठवीं के बाद इन बच्चों को निजी स्कूल की फीस जमा करानी होती है या फिर सरकारी स्कूलों में दाखिला लेना होता है। राजधानी में बर्रई स्कूल में पहुंचे एक अभिभावक विनोद को स्कूल वालों ने एडमिशन के लिए इंकार कर दिया। यहां आरटीई के तहत निजी स्कूल में पढाई पूरी कर चुके बच्चे पहुंचे थे। ऐसा सरकारी निर्देश के चलते हुआ। जिसमें निजी स्कूल के बच्चों को सांदीपनी में एडमिशन पर मना किया गया। इसमें आरटीई के बच्चे भी शामिल कर लिए गए। स्कूल प्राचार्य एचके परिहार ने बताया आरटीई के लिए कोई अलग से नियम नहीं आया। ये निजी की केटेगरी में गिने गए हैं।
सांदीपनी स्कूल के संचालक लोक शिक्षण संचालनालय के प्रमोद सिंह ने बताया कि सांदीपनी में एडमिशन के लिए पहली प्राथमिकता सरकारी स्कूल के बच्चे हैं। इनके बाद अगर सीट बचती हैं तो बाकी को एडमिशन दिया जायेगा । इस संबंध में अलग से अभी कोई निर्देश नहीं है।


Leave a Reply