नई दिल्ली: संघर्ष के बीच ईरान ने सऊदी अरब में स्थित अमेरिकी दूतावास को निशाना बनाया। हमले में मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया, जिससे इलाके में भारी विस्फोट हुआ और आसपास की इमारतों को भी नुकसान पहुंचा।
इसराइल और अमेरिका ने तेहरान में राष्ट्रपति कार्यालय और सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की इमारत हवाई अड्डों के अलावा परमाणु संयंत्र वाले इरफान और सिराज शहरों पर भी भीषण हवाई हमले किए l बुशेहर हवाई अड्डे पर एक यात्री विमान तबाह हो गया l संयुक्त राष्ट्र के परमाणु निगरानी संस्था इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी ने ईरान के नतांस परमाणु समुद्र संवर्धन केंद्र हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि सोमवार के हमले में नुकसान पहुंचा है l किसी तरह का रेडियो धर्मी रिसाव नहीं हुआ हैl हमले के बाद अमेरिका ने खाड़ी के 12 देश से अपने कर्मचारियों को सपरिवार देश छोड़ने का आदेश दिया ईरान में 800 लोग मारे जा चुके हैं l ईरानी हमले में अब तक छह अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है, तेल टैंकरों पर ईरान के हमले में तीन भारतीय नागरिकों की भी मौत हुई हैl रिवॉल्यूशनरी गार्ड ने होर्मुज जलडमरू मध्य को पूरी तरह से बंद करने का ऐलान किया है । ईरान स्थित भारतीय दूतावास में देश में रह रहे गरीब 9000 लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है । उन्हें आपात स्थिति में ही घर से बाहर निकलने को कहा गया है।
इस घटना के बाद अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। अमेरिकी प्रशासन ने कहा कि इस तरह के हमलों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।
वहीं मध्य-पूर्व में पहले से जारी तनाव के बीच यह हमला हालात को और गंभीर बना सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात नहीं संभले तो क्षेत्र में संघर्ष और व्यापक हो सकता
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच इजरायल, अमेरिका और ईरान के नेताओं के बयान सामने आए हैं। तीनों देशों के शीर्ष नेताओं ने अपने-अपने दृष्टिकोण से मौजूदा हालात पर प्रतिक्रिया दी है।
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के खिलाफ चल रहा संघर्ष बहुत लंबे समय तक नहीं चलेगा। उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा कि यह युद्ध तेज और निर्णायक हो सकता है। हालांकि इसमें कुछ समय लग सकता है, लेकिन इसके वर्षों तक चलने की संभावना नहीं है।
वहीं अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के नेतृत्व ने बातचीत की पहल करने में बहुत देर कर दी। उनके मुताबिक ईरान की वायु रक्षा प्रणाली और सैन्य ढांचा काफी हद तक कमजोर हो चुका है। ट्रंप का मानना है कि मौजूदा हालात में ईरान के पास ज्यादा विकल्प नहीं बचे हैं।
दूसरी ओर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर बिना किसी ठोस कारण के हमला किया है। अराघची के अनुसार ईरान को अपनी रक्षा करने और जवाब देने का पूरा अधिकार है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन बयानों से साफ है कि मध्य-पूर्व में तनाव अभी कम होने के संकेत नहीं हैं और आने वाले दिनों में हालात और संवेदनशील हो सकते हैं।


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