एमपी में अतिक्रमण हटाने का अभियान तेज, नदियों-तालाबों के किनारे से हटेंगे कब्जे
संवाददाता
10 March 2026
अपडेटेड: 3:19 PM 0thGMT+0530
10 मार्च 2026
मध्य प्रदेश सरकार राज्यभर में अतिक्रमण हटाने के लिए बड़ा अभियान चलाने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश के बाद प्रशासन ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। यह अभियान केवल शहरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि गांवों में भी चलाया जाएगा।
राज्य सरकार गुड़ी पड़वा से ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ शुरू करने जा रही है। इस अभियान के तहत तालाबों, नदियों के कैचमेंट एरिया और नदी मुहानों से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाएगी।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार प्रदेश के 163 छोटे शहरों में पुराने जलस्रोतों पर हुए कब्जों को चिन्हित किया जा रहा है। वहीं प्रदेश की करीब डेढ़ हजार पंचायतों में भी अतिक्रमण के मामले सामने आए हैं। मध्य प्रदेश में छोटी-बड़ी मिलाकर लगभग 207 नदियां हैं, जिनमें से करीब 70 नदियों के मुहानों और किनारों पर बड़े अतिक्रमण पाए गए हैं।
ऐसे हटाया जाएगा अतिक्रमण
अभियान शुरू होने से पहले सभी पुराने और नए अतिक्रमणों को चिन्हित कर उनकी जानकारी जिला प्रशासन को दी जाएगी। इसके बाद सभी राजस्व अधिकारियों को इसकी सूचना दी जाएगी। अधिकारी यह जांच करेंगे कि सरकारी जमीन पर किस प्रकार का अतिक्रमण हुआ है। इसके बाद संबंधित लोगों को नोटिस दिया जाएगा और फिर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन का कहना है कि नदियों की अविरल धारा बनाए रखने और जलस्रोतों को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें अतिक्रमण से मुक्त कराना जरूरी है।
19 मार्च से शुरू होगा ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’, जल स्रोतों के संरक्षण पर रहेगा फोकस
मध्य प्रदेश सरकार 19 मार्च को वर्ष प्रतिपदा (गुड़ी पड़वा) से प्रदेशभर में ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ शुरू करने जा रही है। इस अभियान के तहत विक्रम संवत, पर्यावरण संरक्षण और जल संरचनाओं के संरक्षण से जुड़े कई कार्यक्रम एक साथ आयोजित किए जाएंगे।
23 से 24 मई तक भोपाल में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय जल सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इसके बाद 25 और 26 मई को ‘शिप्रा परिक्रमा यात्रा’ निकाली जाएगी, जबकि 26 मई को गंगा दशहरा के अवसर पर उज्जैन में शिप्रा तट पर महादेव नदी कथा का आयोजन होगा।
30 मई से 7 जून तक भोपाल के भारत भवन में ‘सदानीरा संगम’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसी कार्यक्रम के दौरान कृषि भूमि के सैटेलाइट मैपिंग सिस्टम का भी लोकार्पण किया जाएगा।
अभियान शुरू होने से पहले प्रदेशभर में तालाबों, नदियों के उद्गम स्थलों और नदी किनारों पर हुए अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए नगरीय प्रशासन और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने काम शुरू कर दिया है। अगले सप्ताह इस विषय पर एक बैठक भी आयोजित की जाएगी, जिसमें जल स्रोतों और अतिक्रमण की स्थिति की समीक्षा की जाएगी।