10 मार्च 2026/मध्य प्रदेश/

आयुष्मान योजना: अब अस्पतालों में जरूरी होगा एनएबीएच सर्टिफिकेट:

आयुष्मान भारत योजना को लेकर मध्य प्रदेश में नया विवाद खड़ा हो गया है। राज्य सरकार ने आदेश जारी किया है कि 31 मार्च के बाद भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में वही निजी अस्पताल योजना के तहत सेवाएं दे सकेंगे, जिनके पास एनएबीएच (नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल) का फाइनल लेवल सर्टिफिकेट होगा।

इस फैसले का असर यह हो सकता है कि इन चार बड़े शहरों के करीब 60 प्रतिशत अस्पताल योजना से बाहर हो जाएं, जिससे मरीजों की परेशानी बढ़ सकती है।

भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर प्रदेश के प्रमुख मेडिकल हब माने जाते हैं। छोटे जिलों के मरीज भी इलाज के लिए इन्हीं शहरों में रेफर किए जाते हैं। सरकार का तर्क है कि इन शहरों में इलाज का दबाव अधिक है और सबसे ज्यादा शिकायतें भी यहीं से आई हैं।

कोविड काल के दौरान बड़ी संख्या में निजी अस्पताल आयुष्मान योजना से जुड़े थे, लेकिन बाद में इलाज की गुणवत्ता और फर्जी बिलिंग की शिकायतें बढ़ने लगीं। इसी कारण सरकार ने पहले इन चार बड़े शहरों में एनएबीएच सर्टिफिकेट को अनिवार्य करने का फैसला किया है, ताकि इलाज की गुणवत्ता में सुधार किया जा सके।

आयुष्मान योजना में नई शर्त से बढ़ेगी मरीजों की परेशानी, महंगा हो सकता है इलाज

मध्य प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना के तहत एनएबीएच सर्टिफिकेट की अनिवार्यता को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि इस फैसले से आम मरीजों को इलाज के लिए ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार छोटे निजी अस्पताल, नर्सिंग होम और ग्रामीण क्लीनिक इस योजना से बाहर हो सकते हैं, क्योंकि एनएबीएच मान्यता हासिल करने में करोड़ों रुपये का खर्च आता है। ऐसे में मरीजों को इलाज के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ सकता है और आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद उन्हें तुरंत इलाज नहीं मिल पाएगा।

इस फैसले का एक असर यह भी होगा कि बड़े अस्पतालों पर मरीजों का दबाव बढ़ेगा, जिससे वेटिंग लाइन लंबी हो सकती है और इमरजेंसी मरीजों को समय पर भर्ती मिलने में दिक्कत हो सकती है। साथ ही इलाज का रुख बड़े कॉर्पोरेट अस्पतालों की ओर बढ़ेगा, जिससे चिकित्सा खर्च भी बढ़ सकता है।

इस निर्णय का आईएमए और नर्सिंग होम एसोसिएशन ने विरोध किया है। उनका कहना है कि एनएबीएच मान्यता स्वैच्छिक प्रक्रिया है और इसे अनिवार्य करना उचित नहीं है। उनका यह भी तर्क है कि देश के अन्य राज्यों में आयुष्मान योजना के लिए फाइनल लेवल एनएबीएच सर्टिफिकेट अनिवार्य नहीं है, फिर मध्य प्रदेश के चार शहरों में ही यह शर्त क्यों लागू की गई है।

आयुष्मान भारत मध्य प्रदेश के सीईओ डॉ. योगेश भारसट ने कहा कि अस्पतालों में बेहतर क्वालिटी ऑफ ट्रीटमेंट सुनिश्चित करने के लिए नियमों का पालन किया जा रहा है और जरूरत पड़ने पर इस मुद्दे की समीक्षा भी की जाएगी।