4 मई 2026
ओटावा:

कनाडा की खुफिया एजेंसी ‘कैनैडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस’ (CSIS) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा किया है। एजेंसी ने चेतावनी दी है कि कनाडा में सक्रिय खालिस्तानी तत्व अब एक ‘हिंसक चरमपंथी खतरा’ बन चुके हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कनाडा की धरती का इस्तेमाल भारत के खिलाफ साजिश रचने, कट्टरपंथी गतिविधियों को बढ़ावा देने और हिंसा के लिए फंड जुटाने के लिए किया जा रहा है।
फंडिंग और हिंसा की बड़ी साजिश
खुफिया रिपोर्ट में यह साफ कहा गया है कि कनाडा में मौजूद कुछ खास कट्टरपंथी समूह देश के लोकतांत्रिक माहौल का गलत फायदा उठा रहे हैं। ये समूह न केवल हिंसा की योजना बना रहे हैं, बल्कि प्रचार-प्रसार और फंडिंग जुटाने के लिए सामुदायिक संस्थानों का भी सहारा ले रहे हैं। चिंता की बात यह है कि इन पैसों का इस्तेमाल हिंसक गतिविधियों के लिए किया जा सकता है, जिससे कनाडा की सुरक्षा एजेंसियां अब हाई अलर्ट पर हैं।
विदेशी हस्तक्षेप का बढ़ता जाल
रिपोर्ट केवल स्थानीय समूहों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें विदेशी ताकतों के दखल पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। एजेंसी ने चीन, रूस, ईरान और पाकिस्तान जैसे देशों का नाम लेते हुए कहा है कि ये देश कनाडा की राजनीति और समाज को अपने फायदे के लिए प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।
1. चीन पर आरोप है कि वह फर्जी कंपनियों के जरिए संवेदनशील जानकारी रखने वाले लोगों को निशाना बनाता है।
2. रूस पर आरोप है कि वह सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से गलत जानकारियां फैलाकर कनाडाई समाज में फूट डाल रहा है।
3. ईरान पर अपने विरोधियों को डराने-धमकाने और नुकसान पहुँचाने की साजिश रचने का आरोप है।

मीडिया और राजनीति के जरिए पाकिस्तान का खेल
पाकिस्तान को लेकर रिपोर्ट में कहा गया है कि वह कनाडा के मीडिया, राजनीति और सामाजिक संगठनों के जरिए अपना एजेंडा चलाने की कोशिश करता है। रिपोर्ट में एक खास बात यह भी कही गई है कि कनाडा की ‘मल्टीकल्चरल’ नीतियों के कारण अक्सर जायज सांस्कृतिक गतिविधियों और चरमपंथी गतिविधियों के बीच का फर्क मिट जाता है। इसी धुंधली रेखा का फायदा उठाकर कट्टरपंथी तत्व अपनी पैठ जमा लेते हैं।
सरकार को सख्त कदम उठाने की सलाह
CSIS ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो कनाडा की सुरक्षा और लोकतंत्र को भारी नुकसान हो सकता है। एजेंसी ने निम्नलिखित सुझाव दिए हैं:
* विदेशी फंडिंग की बारीकी से जांच की जाए।
* देशों के बीच होने वाले ‘ट्रांसनेशनल अपराधों’ पर कड़ी कार्रवाई हो।
* जनता के बीच पारदर्शिता बढ़ाई जाए ताकि लोग इन खतरों को समझ सकें।
रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि पिछले साल कनाडा में कोई बड़ी हिंसक घटना नहीं हुई, लेकिन इन समूहों की लगातार बढ़ती सक्रियता भविष्य के लिए एक बड़ा खतरा बनी हुई है।