8 August 2026:

एक तस्वीर… एक वीडियो… और सिर्फ एक क्लिक, जो असली और नकली के बीच की पूरी कहानी सामने ला सकता है…..अब इसी खतरे को लेकर केंद्र सरकार ने टेक दिग्गज Meta पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है….केंद्र सरकार ने Meta से Deepfake के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने को कहा है…..कंपनी के साथ हुई बैठकों के नतीजों की समीक्षा के बाद सरकार आगे की कार्रवाई को लेकर कानूनी राय भी लेगी…..सरकार अब ये जांच रही है कि Meta भारतीय कानून के तहत Intermediary के तौर पर तय नियमों का पालन कर रहा है या नहीं…..इसके साथ ही दूसरे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को भी बुलाया जाएगा और देखा जाएगा कि वे भारतीय कानून में Intermediary की परिभाषा के दायरे में आते हैं या नहीं…दरअसल, पूरा मामला प्लेटफॉर्म की भूमिका को लेकर है….अगर कोई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म सिर्फ यूजर्स की सामग्री को आगे पहुंचाता है, तो उसे कानून के तहत कुछ सुरक्षा मिलती है…… लेकिन अगर वही प्लेटफॉर्म अपनी तकनीक के जरिए यह तय करता है कि किस यूजर को कौन-सी सामग्री दिखाई जाएगी, तो उसकी जिम्मेदारी पर सवाल उठ सकता है….आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत Intermediaries को कुछ कानूनी सुरक्षा मिलती है…….. लेकिन इसके लिए कानून का पालन और उचित सावधानी यानी Due Diligence जरूरी है….सरकारी सूत्रों के मुताबिक, अगर प्लेटफॉर्म की Recommendation System यह तय करती है कि किस व्यक्ति को कौन-सा कंटेंट दिखेगा, या भुगतान वाली सामग्री को प्राथमिकता देकर प्रमोट किया जाता है, तो प्लेटफॉर्म के Intermediary दर्जे पर सवाल उठ सकते हैं….सरकार का तर्क है कि अगर प्लेटफॉर्म सक्रिय रूप से कंटेंट को चुनने और दिखाने में भूमिका निभाता है, तो उसकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए…इसी वजह से सरकार ने Meta से Deepfake, बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री यानी CSAM, और बिना लेबल वाले AI-generated कंटेंट को लेकर उसकी कार्ययोजना पर जवाब मांगा है…सरकार और Meta के बीच लगातार बैठकों का दौर चला। दो दिन की कड़ी पूछताछ के बाद तीसरे दिन तकनीकी स्तर पर विस्तृत चर्चा हुई….इन बैठकों में Deepfake और AI से बने कंटेंट के अलावा CSAM पर भी विशेष ध्यान दिया गया…सरकार अब इन बैठकों के नतीजों की समीक्षा करेगी और उसके बाद तय होगा कि कानूनी तौर पर आगे क्या कदम उठाए जा सकते हैं। अगले सप्ताह एक और बैठक होने की संभावना है…दरअसल, यह पूरा मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक Facebook पोस्ट पर अस्थायी रोक के बाद सामने आया….Meta ने बाद में इसे AI आधारित Content Filter की गलती बताया, पोस्ट बहाल की और माफी भी मांगी….लेकिन सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भारतीय कानून के तहत निर्धारित Due Diligence का पालन करना जरूरी है…अगर कोई Intermediary इन कानूनी जिम्मेदारियों को पूरा नहीं करता, तो आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा खत्म हो सकती है…. इसके बाद आईटी एक्ट और भारतीय न्याय संहिता समेत लागू कानूनों के तहत कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है…..सूत्रों के मुताबिक Meta ने गंभीर मुद्दों को स्वीकार किया है….प्रधानमंत्री की Facebook पोस्ट पर रोक के बाद Meta के Global Affairs Head Joel Kaplan के नेतृत्व में कंपनी की टीम ने IT मंत्री अश्विनी वैष्णव और IT सचिव एस. कृष्णन से मुलाकात की थी…अब कानूनी राय के आधार पर अगला कदम तय हो सकता है…यानी मामला सिर्फ Deepfake हटाने का नहीं… असली सवाल ये है कि डिजिटल दुनिया में कंटेंट को कौन नियंत्रित करता है, और जब वही कंटेंट नुकसान पहुंचाए तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी….

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