3 June 2026:
खबर प्रधान डेस्क:
महाराष्ट्र/ महाराष्ट्र की सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं के लिए मुख्यमंत्री मांझी लाडली बहन योजना की शुरुआत की । इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य की 21 से 65 आयु वर्ग की महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्रता प्रदान करना, उनके स्वास्थ्य और पोषण के स्तर में सुधार लाना, परिवार में उनके निर्णय की भूमिका को मजबूत करना प्रमुख कारण है । इस योजना के तहत सभी पात्र लाभार्थी महिलाओं को सीधे उनके बैंक खाते में ₹1500 प्रतिमाह डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से भेजे जाते हैं।
किंतु इस योजना के करीब 63 लाख लाभार्थियों के नाम काटे गए हैं। सितंबर 2025 में इस योजना का लाभ उठाने वाली महिलाओं की संख्या 2.4 करोड़ से अधिक थी ,जो मई 2026 तक यह घटकर 1.7 करोड़ रह गई है।
संख्या में कमी की मुख्य वजह ई-केवाईसी अभियान:
इन संख्या में कमी की मुख्य वजह सरकार द्वारा केवाईसी अभियान का चलाना माना जा रहा है । इस जांच के द्वारा परिवार की सालाना आय दूसरी सरकारी योजनाओं का लाभ उठाना, चौपाहियां वाहन का मालिकाना हक और सरकारी नौकरी जैसे मानदंडों को आधार बनाया गया है।
जांच के द्वारा पता चला कि करीब 50 लाख महिलाओं ने या तो अपने फार्म जमा नहीं किए हैं या इस प्रक्रिया के दौरान अपात्र पाई गई है । करीब 12 लाख ऐसी महिलाएं थीं, जिनकी परिवार की वार्षिक आय निर्धारित 2.5 लाख से अधिक पाई गई। जांच में यह भी पाया गया कि करीब 5 लाख महिलाओं के पास चौपाहियां वाहन भी पाए गए ,जिसे नियमों के अनुसार इस योजना से बाहर कर दिया गया।
5 लाख महिलाएं नमो शेतकरी योजना का लाभ भी ले रही थी और करीब 4.5 लाख महिलाएं, जो 65 वर्ष की अधिकतम आयु को पार कर चुकी थी।
इस ई- केवाईसी अभियान के तहत लाभार्थियों की संख्या में कमी आई है। सरकार ने कई मानदंडों को आधार बनाकर कड़े पैमानों पर लाभार्थियों के आवेदनों की जांच की।
इस योजना को लेकर विपक्ष ने सरकार पर कसा तंज:
केवाईसी अभियान के तहत संख्या में आई कमी के देखते हुए राज्य में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। और विपक्ष ने सरकार पर दिखे हमले शुरू कर दिए।
शरद पवार की गुट की रोहिणी ने सरकार पर तंज करते हुए कहा कि प्रशासन के पास विज्ञापनों और विदेशी दौरों के लिए तो पैसा है किंतु बहनों को देने के लिए ₹1500 नहीं है।
महिला और बाल कल्याण राज्य मंत्री मेघना बोर्डीकर ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वास्तव में किसी भी जरूरतमंद महिला को इस योजना से हटाया नहीं गया है । सरकार ने केवल उन महिलाओं को इस योजना से हटाया है जो इन शर्तों को पूरा नहीं करते या जिन्होंने अपने केवाईसी फॉर्म को नहीं भरा है।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट रूप से बताया:
इधर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट रूप से कहा है कि मुख्यमंत्री मांझी लड़की बहन योजना बंद नहीं होगी । उन्होंने कहा कि ई- केवाईसी सत्यापन के बाद 80 लाख लाभार्थी को सूची से हटा दिया गया है।
किंतु लाखों ऐसी लाभार्थी महिलाएं हैं जो इस योजना की वास्तविक हकदार हैं, जो इस योजना की तय शर्तों के अंतर्गत आती हैं । ऐसी करीब 1.70 करोड़ पात्र महिलाओं को योजना का लाभ मिलता रहेगा । यानी देवेंद्र फणनवीस की सरकार को भी बीच में आना पड़ा । दरअसल इसमें एक बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया। .जैसे ही फर्जीवाड़े का पता चला महाराष्ट्र सरकार को सफाई देने सामने आना पड़ा। सरकार ने कहा है कि न तो योजना बंद होने जा रही है। और न किसी के पैसे रोके जायेंगे लेकिन इस योजने के साथ जो फर्जीवाड़ा किया जा रहा है उन्हें जरूर उचित दंड दिया जायेगा। जो भी इसमें लिप्त होगा उसका अच्छे से इलाज किया जायेगा
करीब 14 हजार पुरुष भी ले रहे थे इस योजना का लाभ:
सरकार की महत्वाकांक्षी ‘लाडकी बहन योजना’ है जिसमें खबर मिली कि कुछ पुरूष भी इस योजना का लाभ उठा रहे हैं.। और ऐसे में 81 लाख महिलाओं के अपात्र पाए जाने के बाद उनके खाते में जमा की गई राशि वापस लेने की खबरें आने लगीं।इस पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं. इस बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का बयान सामने आया है उन्होंने सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि अपात्र घोषित की गई महिलाओं से किसी प्रकार की वसूली नहीं की जाएगी. हालांकि इस योजना का लाभ लेने वाले 14 हजार पुरुषों से पूरी राशि वसूल की जाएगी। दरअसल लाडली बहन योजना में बड़ी संख्या में लाभार्थियों के अपात्र पाए जाने के बाद विपक्ष लगातार महायुति सरकार पर निशाना साध रहा था। मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि डेटाबेस के माध्यम से लाभार्थियों की जांच की गई, जिसमें महिलाओं के नाम पर आवेदन कर लाभ लेने वाले 14 हजार पुरुषों की पहचान हुई है
इसके अलावा 5 लाख सरकारी कर्मचारी, 10 लाख आयकरदाता महिलाएं और 5 लाख चारपहिया वाहन रखने वाली महिलाएं भी योजना के लिए अपात्र पाई गईं. जानकारी के अनुसार ई-केवाईसी अनिवार्य किए जाने के बाद भी कई महिलाओं ने प्रक्रिया पूरी नहीं की। वहीं करीब 25 लाख महिलाओं के ई-केवाईसी में त्रुटियां थीं,जिन्हें सुधार का अवसर दिया गया. इसके बाद ही अपात्र लाभार्थियों का मानदेय यानी किस्त बंद किया गया।
इस योजना के लिए केवाईसी विंडो को दोबारा खोलने पर भी किया जा रहा विचार:
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि योजना का ऑडिट कैग के माध्यम से किया जाएगा। ऐसे में अपात्र लाभार्थियों को दी गई राशि पर सवाल उठ सकते हैं। उन्होंने बताया कि इसमें कई महिलाओं ने हमे आवेदन दिया है कि ई-केवाईसी करने के बाद भी उन्हें लाभ से वंचित रखा गया है। उन्होंने कहा कि सरकार इसकी जांच कर रही है और दोबारा इस योजना की किस्त चालू करवाने पर काम किया जा रहा है। सीएम ने कहा कि यह जनता का पैसा है और इसका उपयोग नियमानुसार होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सरकार जरूरत पड़ने पर लाडकी बहन योजना के लिए ई-केवाईसी की विंडो दोबारा खोलने पर भी विचार कर रही है। ताकि इस तरह का फर्जीवाड़ा न होने पाए।सभी सरकारी योजनाओं में ये ई-केवाईसी जरूरी है। ये जो 80 लाख का आंकड़ा है – ये सिर्फ ई-केवाईसी का नहीं है। इसमें इनकम टैक्स विभाग ने जो 8-10 महीने में जानकारी जुटा कर दी । इधर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के नेता जयंत पाटिल ने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव से पहले महिलाओं को बड़े पैमाने पर योजना का लाभ दिया गया, लेकिन अब 80 लाख महिलाओं को अपात्र घोषित किया जा रहा है. उन्होंने इसे राज्य की आर्थिक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला बताया । तो विपक्ष जो एख मौका देखकर इस पर बवाल कर रहे हैं उन्हें सीएम फणनवीस का बयान सुनना चाहिए ताकि भ्रामक जानकारी जनता तक न पहुंचाई जाए।


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