खामेनेई का खात्मा: ईरान बोला खतरनाक बदला लेंगे

khabar pradhan

संवाददाता

2 March 2026

अपडेटेड: 6:02 PM 0ndGMT+0530

खामेनेई का खात्मा: ईरान बोला खतरनाक बदला लेंगे

2 मार्च 2026

तेहरान : अयातुल्ला  खामेनेई की मौत

शनिवार देर रात हुए अमेरिकी हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला  खामेनेई (86) की मौत की पुष्टि के बाद हालात और गंभीर हो गए हैं। हमले में रक्षा मंत्री, आर्मी चीफ और गार्ड्स चीफ समेत 40 से ज्यादा कमांडर भी मारे गए बताए जा रहे हैं। खामेनेई 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता थे।

ईरानी सरकार ने उनकी मौत की पुष्टि करते हुए 40 दिन के राष्ट्रीय शोक का ऐलान किया है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि देश इस हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। वहीं अमेरिका और सहयोगी देश भी संभावित जवाबी कार्रवाई को लेकर सतर्क हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि इस संघर्ष में ईरान को भारी नुकसान का सामना करना पड़ेगा।

ईरान की जवाबी कार्रवाई

रविवार को अमेरिका ने तेहरान समेत ईरान के कई शहरों पर मिसाइल हमले किए। इन हमलों में करीब 10 शहरों को निशाना बनाया गया। दूसरी ओर ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी हमले के दूसरे दिन पूर्व राष्ट्रपति अहमदीनेजाद की हत्या का दावा किया। ईरान ने यह भी कहा कि अमेरिकी हमले में उसके नौ जहाज डूब गए हैं।

ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों को भी निशाना बनाया है। ओमान, सऊदी अरब समेत 8 देशों में मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए। अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस अब्राहम लिंकन पर 4 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं, हालांकि यह युद्धपोत किसी नुकसान से बच गया।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने दावा किया है कि ईरान ने अब तक 165 बैलिस्टिक मिसाइलें और 541 ड्रोन दागे हैं। हालात को देखते हुए खाड़ी और पश्चिम एशिया के कई देशों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है।

2 हजार किलो वजनी 40 बंकर बस्टर बम से तबाही

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को निशाना बनाकर किए गए हमले को लेकर बड़े खुलासे सामने आए हैं। इजरायल के एफ-35 लड़ाकू विमानों ने ईरान की एयर डिफेंस प्रणाली को भेदते हुए तेहरान स्थित खामेनेई के आवासीय परिसर पर भारी बमबारी की। बताया जा रहा है कि करीब 2 हजार किलो वजनी 40 बंकर बस्टर बम गिराए गए, जिनका मकसद भूमिगत ठिकानों को भी तबाह करना था। इन लेजर-गाइडेड पेनिट्रेटर बमों से परिसर के नीचे बने सुरक्षित ठिकानों को भी नुकसान पहुंचाया गया।

ईरान के रक्षा मंत्री और 40 अधिकारियों की भी मौत

हमले में ईरान के रक्षा मंत्री आमिर नासिरजादा, आर्मी चीफ अमीर हातामी और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के प्रमुख मोहम्मद पाकपोर के मारे जाने की खबर है। साथ ही लगभग 40 वरिष्ठ अधिकारी और धार्मिक नेता भी मारे गए बताए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, इन अधिकारियों में से करीब 15 लोग उस समय खामेनेई के परिसर में बैठक के लिए मौजूद थे। बताया जाता है कि यह पूरी कार्रवाई कुछ ही मिनटों में पूरी कर ली गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, हमले के दौरान इजरायली विमानों ने रैम्पेज और डेलिला क्रूज मिसाइलों का भी इस्तेमाल किया। कहा जा रहा है कि इन विमानों ने इजरायली बेस और खाड़ी क्षेत्र में तैनात युद्धपोत यूएसएस अब्राहम लिंकन से उड़ान भरी थी। कुछ विमानों ने अजरबैजान में अमेरिकी एयरबेस से भी ऑपरेशन को अंजाम दिया।

नए सुप्रीम लीडर को 1.2 दिन में कमान

इस बीच ईरान में नए सर्वोच्च नेता को लेकर प्रक्रिया तेज हो गई है। विदेश मंत्री ने कहा है कि अगले एक-दो दिन में नए सुप्रीम लीडर का चयन कर लिया जाएगा। खामेनेई के बाद देश में सर्वोच्च नेतृत्व की जिम्मेदारी अंतरिम लीडरशिप काउंसिल संभाल रही है, जिसे इस प्रक्रिया को पूरा करने का अधिकार दिया गया है।

इस अंतरिम काउंसिल में अली रजा अराफी को शामिल किया गया है, जो फिलहाल एक्सपर्ट्स असेंबली के उपाध्यक्ष हैं और सुप्रीम लीडर के चयन की प्रक्रिया की देखरेख करते हैं। इसके अलावा राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और चीफ जस्टिस गुलाम हुसैन मोहसेनी भी इसमें सदस्य हैं। बताया जा रहा है कि यह काउंसिल विशेषज्ञों से सलाह लेकर नए नेता का चयन करेगी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान में सर्वोच्च नेता का पद बेहद महत्वपूर्ण होता है और सेना, विदेश नीति तथा रणनीतिक फैसलों पर अंतिम अधिकार उसी के पास होता है। इसलिए नए नेता के चयन को लेकर देश और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें ईरान पर टिकी हुई हैं।

यह टकराव पूरी दुनिया को प्रभावित कर सकता है।

अमेरिका-ईरान तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और दुनिया में यह सवाल उठ रहा है कि क्या हालात तीसरे विश्व युद्ध की ओर बढ़ रहे हैं। कई देशों में इस संघर्ष को लेकर आपात बैठकें हो रही हैं और आशंका जताई जा रही है कि अगर टकराव बढ़ा तो इसके गंभीर वैश्विक असर होंगे।

सबसे बड़ी चिंता क्षेत्रीय अस्थिरता को लेकर है। यदि ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व को नुकसान पहुंचता है या देश में बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा होता है, तो मध्य-पूर्व के कई देश सीधे इस संघर्ष में शामिल हो सकते हैं। इससे पूरे क्षेत्र में असंतुलन पैदा होगा और संघर्ष लंबे समय तक चल सकता है।

आर्थिक असर भी बेहद गंभीर हो सकता है। खाड़ी क्षेत्र तेल उत्पादन का केंद्र है, ऐसे में युद्ध बढ़ने से तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होगी। इसका असर वैश्विक बाजार पर पड़ेगा और महंगाई बढ़ सकती है।

अमेरिका के लिए यह संघर्ष बड़ी चुनौती बन सकता है, क्योंकि उसे अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा और वैश्विक संतुलन दोनों संभालने पड़ेंगे। लंबे युद्ध की स्थिति में सैन्य और आर्थिक दबाव बढ़ेगा, जिससे अमेरिका की घरेलू राजनीति पर भी असर पड़ेगा।

इजरायल के लिए भी यह मुकाबला महत्वपूर्ण है। उसे सुरक्षा के साथ-साथ क्षेत्रीय राजनीति और गठबंधनों को संतुलित करना होगा। यदि युद्ध लंबा खिंचता है तो इजरायल पर भी संसाधनों और रणनीतिक दबाव बढ़ सकता है।

पाकिस्तान और अन्य देशों की भूमिका भी चर्चा में है, क्योंकि वे कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। कई देश खुलकर किसी एक पक्ष का समर्थन नहीं कर रहे, लेकिन हालात बिगड़ने पर उन्हें फैसला लेना पड़ सकता है।

दुबई और खाड़ी देशों पर भी असर की आशंका है। पर्यटन, व्यापार और निवेश पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। लगातार हमलों से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और समुद्री व्यापार में बाधा आने का खतरा बढ़ गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं हुए तो यह संघर्ष वैश्विक स्तर पर अस्थिरता बढ़ा सकता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय शांति वार्ता और मध्यस्थता पर जोर दे रहा है, ताकि बड़े युद्ध की स्थिति को टाला जा सके।

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