2 March 2026:

बुराई पर अच्छाई का पर्व का प्रतीक है होली।
भारतीय संस्कृति में फागुन मास की पूर्णिमा को धार्मिक आस्था और परंपरा के अद्भुत संगम के रूप में होली का पर्व मनाया जाता है

होली से एक दिन पूर्व होलिका दहन किया जाता है जिसे बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है होली के पर्व में होलिका दहन का विशेष महत्व होता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार:
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलिका दहन में  गाय के गोबर से बने हुए कंडे अर्पित करने की एक विशेष परंपरा होती है।
आईए जाने गोबर के कंडे अर्पित क्यों किए जाते हैं:
सनातन धर्म में गाय को बहुत पवित्र माना जाता है।‌ इसी कारण गाय के गोबर से बने हुए उपलों  को शुद्ध और पवित्र माना गया है।
गाय के उपले होलिका दहन में अर्पित करने से वातावरण के नकारात्मकता नष्ट होती है और आध्यात्मिक शुद्धि का वातावरण बनता है।
ऐसा माना जाता है कि होलिका दहन में गाय के गोबर से बने हुए कंडे और उपले अर्पित करने से घर परिवार में सुख शांति का संचार होता है।‌ इससे व्यक्ति अपनी परेशानियां दुख और नकारात्मक शक्ति को उपलों  के रूप में होलिका दहन में अर्पित करके सभी बाधाओं  को जलाकर राख कर देने की प्रार्थना करता है । इससे जीवन में नई आशा का संचार होता है।

होलिका दहन से पहले महिलाएं गोबर के उपले तैयार करती हैं। उन्हें सुखाकर होलिका दहन के लिए तैयार करती हैं ।यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। अग्नि देव को साक्षी मानकर लोग अपने अंदर की नकारात्मक भावनाओं को त्यागने का संकल्प करता है।  इससे आत्मा की शुद्धिके साथ साथ सामाजिक एकता सांस्कृतिक परंपरा का बन जाता है।

वैज्ञानिक आधार:
होली का पर्व ऋतु परिवर्तन का संकेत लेकर आता है। सर्दी खत्म होने को होती है और गर्मी की शुरुआत होती है।
होलिका दहन में गाय के गोबर के कंडे जलाने से वातावरण शुद्ध होता है।  गोबर में ऐसी प्राकृतिक गुण होते हैं जिसके कारण उत्पन्न हुए धुएं से वातावरण शुद्ध होता है।  इससे मौसमी बीमारियों से बचाव भी होता है।