गुजरात: भगवान रणछोड़जी के साथ रंगों में डूबेंगे लाखों भक्त
संवाददाता
2 March 2026
अपडेटेड: 5:58 PM 0ndGMT+0530
2 मार्च 2026
भगवान कृष्ण का प्राचीन मंदिर रणछोड़ जी:

गुजरात के डाकोर में स्थित प्रसिद्ध रणछोड़जी मंदिर में होली का उत्सव इस बार भी खास होने जा रहा है। पूर्णिमा के अवसर पर मंदिर के द्वार श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं और भगवान कृष्ण के स्वरूप रणछोड़जी के साथ पारंपरिक रूप से रंगों की होली खेली जाएगी।
इस बार करीब 5 लाख भक्तों के पहुंचने का अनुमान है। डाकोरधाम को रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया है, जिससे पूरा परिसर भक्तिमय और उत्सवी माहौल में नजर आ रहा है। देशभर से श्रद्धालु यहां पहुंचकर दर्शन करेंगे और भगवान के साथ होली का आनंद लेंगे।
क्यों रखा गया मंदिर का नाम रणछोड़जी:

गुजरात के खेड़ा जिले में स्थित डाकोर का रणछोड़जी मंदिर भगवान श्रीकृष्ण के प्रमुख और प्राचीन तीर्थों में से एक माना जाता है। यहां भगवान कृष्ण को रणछोड़राय या रणछोड़जी के रूप में पूजा जाता है, जिसका अर्थ है “रण छोड़ने वाले”। यह नाम उन्हें उस समय मिला, जब उन्होंने मथुरा पर बार-बार हो रहे आक्रमणों से प्रजा की रक्षा के लिए रणनीतिक रूप से द्वारका की ओर प्रस्थान किया।
इस मंदिर से जुड़ी एक बहुत प्रसिद्ध कथा भक्त बोडाणा की है। कहा जाता है कि बोडाणा नाम के एक भक्त द्वारका से हर छह महीने में भगवान के दर्शन के लिए जाते थे। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान कृष्ण स्वयं उनके साथ डाकोर आ गए और यहीं विराजमान हो गए। इस घटना के बाद डाकोरधाम एक प्रमुख तीर्थ बन गया और लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आने लगे।
मंदिर की स्थापत्य शैली:
मंदिर की स्थापत्य शैली भी बेहद आकर्षक है। सफेद पत्थर से बने इस मंदिर में शिखर और गुंबद का सुंदर मिश्रण देखने को मिलता है। यहां रोजाना मंगला आरती, श्रृंगार, राजभोग और संध्या आरती जैसी परंपराएं बड़े उत्साह से निभाई जाती हैं। पूर्णिमा के दिन यहां विशेष भीड़ रहती है, जबकि फाल्गुन पूर्णिमा और कार्तिक पूर्णिमा पर मेले जैसा माहौल रहता है।
छोटी द्वारका:
डाकोर को गुजरात की “छोटी द्वारका” भी कहा जाता है। यहां आने वाले श्रद्धालु गोमती तालाब में स्नान करके रणछोड़जी के दर्शन करते हैं। माना जाता है कि यहां सच्चे मन से प्रार्थना करने पर मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, इसलिए यह स्थान भक्ति, आस्था और परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र है।