चंद्र ग्रहण से जुड़ी परम्परायें और विज्ञान
संवाददाता
2 March 2026
अपडेटेड: 9:03 PM 0ndGMT+0530
2 मार्च 2026
चंद्र ग्रहण से जुड़ी कई मान्यताओं के पीछे वैज्ञानिक और सामाजिक कारण भी बताए जाते हैं। माना जाता है कि जब सूर्य या चंद्रमा की रोशनी कम होती थी, तो पुराने समय में कुछ हानिकारक बैक्टीरिया तेजी से सक्रिय हो सकते थे। उस दौर में भोजन को सुरक्षित रखने के साधन, जैसे फ्रिज, उपलब्ध नहीं थे, इसलिए ग्रहण के दौरान खाना अशुद्ध माना जाता था। आज आधुनिक स्वच्छता और भंडारण की सुविधाओं के कारण इस तरह की चिंता कम हो गई है।
सुरक्षा की दृष्टि से भी कई नियम बनाए गए थे। पहले बिजली नहीं होती थी, इसलिए अंधेरे में गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को चोट लगने का खतरा रहता था। इसी कारण उन्हें घर के अंदर रहने की सलाह दी जाती थी। इसके अलावा पूर्णिमा और ग्रहण के समय समुद्र में ज्वार-भाटा तेज होता है, इसलिए तटीय क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा के लिए भी सावधानियां अपनाई जाती थीं।
ज्योतिष में चंद्रमा को मन का कारक माना गया है। ग्रहण काल को आत्मचिंतन, ध्यान और साधना के लिए विशेष समय बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार इस अवधि में किया गया जप कई गुना फलदायी माना जाता है। यदि कोई कठिन मंत्र न जानता हो, तो शांत बैठकर श्वास पर ध्यान केंद्रित करना भी एक प्रभावी साधना मानी जाती है।
मानसिक शांति के लिए ग्रहण के दौरान “ओम शोम चंद्रमस्य नमः”, “ओम नमः शिवाय”, गायत्री मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र का जाप किया जा सकता है।
सूतक काल ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले माना जाता है। विद्वानों के अनुसार 3 मार्च 2026 को सुबह 6:20 बजे से सूतक आरंभ होगा। होलिका दहन ग्रहण समाप्ति के बाद, यानी 3 मार्च शाम 6:47 बजे के बाद करना शुभ माना है, जबकि रंगों की होली 4 मार्च को उत्साह के साथ मनाई जाएगी।कुछ स्थानों पर 2 मार्च की शाम भी होलिका दहन किया जाएगा l
होली पर बड़ों का सम्मान और आशीर्वाद लेने की परंपरा भी महत्वपूर्ण है। बुजुर्गों के माथे पर अंगूठे से तिलक लगाना या उनके चरणों में गुलाल अर्पित करना शुभ माना जाता है, वहीं महिलाओं को अनामिका उंगली से उनकी हथेली पर रंग लगाना सम्मान का प्रतीक माना जाता है।
संदेश यही है कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि अहंकार और नकारात्मकता को जलाने का अवसर भी है। सुरक्षित और प्राकृतिक रंगों से होली खेलें, प्रेम और सद्भाव बनाए रखें तथा उल्लास के साथ त्योहार मनाएं।