चैत्र पूर्णिमा 2026:कब है चैत्र पूर्णिमा जाने शुभ मुहूर्त और पूजा विधि:

khabar pradhan

संवाददाता

29 March 2026

अपडेटेड: 11:52 PM 0thGMT+0530

चैत्र पूर्णिमा 2026:कब है चैत्र पूर्णिमा जाने शुभ मुहूर्त और पूजा विधि:


29 मार्च2026
चैत्र पूर्णिमा 2026:
हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास में पड़ने वाली पूर्णिमा को चैत्र पूर्णिमा कहते हैं। चैत्र में पड़ने वाली पूर्णिमा का एक अत्यंत विशेष महत्व माना जाता है।  इस पूर्णिमा को आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से भी बेहद शुभ माना जाता है। क्योंकि यह दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ दिन होता है।  चैत्र पूर्णिमा के दिन विधि विधान से माता लक्ष्मी भगवान विष्णु का पूजन करने से जीवन में सुख संपत्ति और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।

चैत्र पूर्णिमा की तिथि और मुहूर्त:
हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र पूर्णिमा 1 अप्रैल 2026 को सुबह 7:06 बजे से प्रारंभ हो रही है और 2 अप्रैल सुबह 7:45 तक समाप्त हो रही है। इस बार दो दिन पूर्णिमा पढ़ने से लोगों में स्पंजेस की स्थिति है की व्रत कब किया जाए।
उदया तिथि के अनुसार 2 अप्रैल को चैत्र पूर्णिमा मनाई जाएगी। किंतु व्रत करने वाले लोग 1 अप्रैल को चैत्र पूर्णिमा का व्रत करेंगे और व्रत का पारण और दान पुण्य 2 अप्रैल को किया जाएगा।

शुभ मुहूर्त:
चैत्र पूर्णिमा का ब्रह्म मुहूर्त में 4:38 से 5:24 तक तप और साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है।
इसके अलावा दोपहर में विजय मुहूर्त और रात में निशिता मुहूर्त पूजन के लिए शुभ मुहूर्त है।
पूजा विधि:
चैत्र पूर्णिमा के दिन सुबह जल्द उठ घर के साफ सफाई करें । घर के मंदिर को साफ करें। स्नानादि  से निवृत हो सूर्य देव को जल अर्पित करें। एक  चौकी पर स्वच्छ लाल या पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।  प्रतिमा ना हो तो कोई तस्वीर भी रख सकते हैं। हल्दी, कुमकुम ,अक्षत, धूप, दीप से भगवान का पूजन करें। फूल चढ़ाएं और घी का दीपक जलाकर आरती करें, विष्णु मंत्रों का जाप करें।
पंचामृत का भोग लगाए।  फल, फूल और मिठाइयां अर्पित करें।
इस दिन सत्यनारायण की कथा सुनने से लाभ होता है। भगवान विष्णु के मंत्र का जाप और माता लक्ष्मी के मंत्रों से पूजा संपन्न करें।  इस दिन घर में हवन करने से घर में सकारात्मक आती है और नकारात्मकता का नाश होता है।
चैत्र पूर्णिमा पर दान का विशेष महत्व होता है इस दिन जरूरतमंदों को अन्न, धन ,वस्त्र दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
परिवार और प्रिय जनों को पूजा का प्रसाद  वितरित करें।

टिप्पणियां (0)