2 मई 2026
जबलपुर:
मध्य प्रदेश के जबलपुर में बरगी बांध पर गुरुवार को एक बड़ा हादसा हो गया। मौसम विभाग की चेतावनी को नजरअंदाज करना 9 सैलानियों के लिए काल बन गया। तेज आंधी और हवाओं के बीच पर्यटकों से भरा क्रूज पानी में डूब गया। इस हादसे ने न केवल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि एक पूरे परिवार को उम्र भर का गम दे दिया है।
चेतावनी के बावजूद क्रूज चलाने की जिद
गुरुवार को मौसम विभाग ने पहले ही 40 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी जारी की थी। इसके बावजूद क्रूज प्रबंधन ने लापरवाही बरती और पर्यटकों को लेकर क्रूज बांध के बीचों-बीच चला गया। जब हवा की गति 74 किलोमीटर तक पहुंची, तो किनारे से महज 300 मीटर की दूरी पर क्रूज अनियंत्रित होकर डूब गया। हादसे के वक्त क्रूज पर कई लोग सवार थे, जिनमें से 19 लोगों को रेस्क्यू टीम ने बचा लिया, लेकिन 9 लोग जिंदगी की जंग हार गए।
मां-बेटे का साथ: मौत भी जिसे जुदा न कर सकी
इस हादसे का सबसे दुखद पहलू दिल्ली से आए एक परिवार के साथ हुआ। मरीना मैसी और उनके 4 साल के बेटे त्रिशान की इस हादसे में मौत हो गई। रेस्क्यू टीम को जब उनके शव मिले, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें भर आईं। मां मरीना ने डूबते समय अपने बेटे को अपनी ही लाइफ जैकेट के भीतर समेट लिया था और उसे सीने से मजबूती से चिपका रखा था। रेस्क्यू टीम ने जब दोनों के शव निकाले, तो वे एक-दूसरे की बाहों में जकड़े हुए थे। पिता प्रदीप मैसी और उनकी बेटी सिया इस हादसे में बाल-बाल बच गए, लेकिन उन्होंने अपनी आंखों के सामने अपने परिवार को खो दिया।
भावुक हुए मंत्री, सरकार ने की कार्रवाई
हादसे के बाद स्थिति का जायजा लेने पहुंचे लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह मां-बेटे के शवों को देखकर अपने आंसू नहीं रोक पाए। वहीं, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को जबलपुर पहुंचकर प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और उन्हें ढांढस बंधाया।
प्रशासन ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है:
1. क्रूज के पायलट महेश पटेल, हेल्पर छोटेलाल गोंड और टिकट प्रभारी बृजेंद्र की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं।
2. बोट क्लब के मैनेजर सुनील मरावी को निलंबित किया गया है और रीजनल मैनेजर संजय मल्होत्रा को मुख्यालय अटैच कर दिया गया है।
3. अपर मुख्य सचिव और संभाग कमिश्नर की एक हाई-लेवल कमेटी इस पूरे मामले की जांच करेगी।
पीड़ित परिवारों की मदद के लिए सरकार ने हाथ बढ़ाए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रत्येक मृतक के परिवार को 2-2 लाख रुपये और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है। इसके साथ ही घायलों के बेहतर इलाज के निर्देश दिए गए हैं।
यह हादसा एक बड़ा सबक है कि सुरक्षा नियमों और मौसम की चेतावनियों को नजरअंदाज करना कितना भारी पड़ सकता है। फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की तहकीकात कर रहा है ताकि भविष्य में ऐसी चूक दोबारा न हो।
जिस क्रूज हादसे ने ली 9 जानें, उस पर NGT ने साल भर पहले ही लगा दी थी रोक
जबलपुर के बरगी बांध में हुए दर्दनाक हादसे के बाद एक ऐसी सच्चाई सामने आई है जिसने सबको चौंका दिया है। पता चला है कि जिस क्रूज को सुरक्षित बताकर चलाया जा रहा था, उस पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने साल 2023 में ही प्रतिबंध लगा दिया था। बावजूद इसके, नियमों को ताक पर रखकर यह मौत का सफर जारी रहा।
नियम टूटे और जिम्मेदार मौन रहे
पर्यावरण प्रेमी सुभाष सी पांडे की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए NGT ने 2023 में स्पष्ट निर्देश दिए थे। ट्रिब्यूनल ने कहा था कि भोपाल के बड़े तालाब और नर्मदा नदी से जुड़े बांधों (जैसे बरगी बांध) के पानी में डीजल से चलने वाले मोटर क्रूज या नावों का संचालन नहीं किया जा सकता। यह फैसला पर्यावरण और जल सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था मामला
हैरानी की बात यह है कि मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक गया था। लेकिन मार्च 2024 में देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सर्वोच्च न्यायालय ने भी NGT के फैसले को सही माना और पाबंदी बरकरार रखी। इसके बावजूद बरगी बांध में मोटराइज्ड क्रूज का संचालन धड़ल्ले से किया जा रहा था, जिसका नतीजा आज सबके सामने है।
खड़े हो रहे हैं ये तीखे सवाल
अब इस खुलासे के बाद पर्यटन विभाग और स्थानीय प्रशासन की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है:
1. जब मार्च 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने भी रोक लगा दी थी, तो किसके आदेश पर यह क्रूज पानी में उतारा गया?
2. क्या क्रूज स्टाफ को आपातकालीन स्थिति से निपटने की कोई ट्रेनिंग दी गई थी?
3. क्या खराब मौसम के लिए मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग के पास कोई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) था?
सुरक्षा व्यवस्था और पर्यावरण नियमों की अनदेखी
इस दुर्घटना ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है, बल्कि यह भी दिखा दिया है कि कैसे पर्यावरण के नियमों को नजरअंदाज किया गया। प्रशासन की यह अनदेखी 9 मासूम जिंदगियों पर भारी पड़ गई। अब देखना यह है कि क्या सिर्फ छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी या उन बड़े अधिकारियों पर भी गाज गिरेगी जिन्होंने कोर्ट के आदेश के बाद भी क्रूज चलाने की हरी झंडी दी थी।


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