27 अप्रैल 2026
जबलपुर:
मध्य प्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर से धर्मांतरण की कोशिश का एक बड़ा मामला सामने आया है। शहर के गौरीघाट थाना क्षेत्र के अंतर्गत दुर्गा नगर में एक मकान के भीतर प्रार्थना सभा की आड़ में बड़े पैमाने पर लोगों का धर्म परिवर्तन कराया जा रहा था। हिंदू संगठनों को जब इसकी भनक लगी, तो उन्होंने मौके पर पहुंचकर जमकर हंगामा किया, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की।
कैसे खुला राज?
रविवार को जब गौरीघाट क्षेत्र में हिंदू संगठनों द्वारा ‘समरसता यात्रा’ निकाली जा रही थी, तभी उन्हें सूचना मिली कि पास के ही एक घर में भारी भीड़ जुटी है और वहां कुछ संदिग्ध गतिविधियां चल रही हैं। जब विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता वहां पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि एक ही परिवार के घर में बड़ी संख्या में हिंदू धर्म के गरीब लोगों को इकट्ठा किया गया था।
लालच देकर धर्मांतरण की साजिश
हिंदू संगठनों का आरोप है कि वहां मौजूद मिशनरी से जुड़े लोग गरीब और भोले-भाले लोगों को पैसों, मुफ्त शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लालच देकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए उकसा रहे थे। मौके से बड़ी संख्या में ईसाई धर्म से जुड़ी पुस्तकें, संदिग्ध सामग्री और एक रजिस्टर भी मिला है। इस रजिस्टर में उन लोगों के नाम और जानकारी दर्ज थी, जिनका पहले धर्मांतरण कराया जा चुका है या कराया जाना था। बताया जा रहा है कि अब तक लगभग 20 से 25 लोगों का धर्म परिवर्तन कराया जा चुका है।
पुलिस की कार्रवाई और हिरासत
हंगामे की खबर मिलते ही गौरीघाट पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला। पुलिस ने मौके से प्रार्थना सभा आयोजित करने वाले मुख्य संदिग्धों सहित करीब दो दर्जन से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया है। पकड़े गए लोगों में महिलाएं, पुरुष और सात-आठ बच्चे भी शामिल हैं। पुलिस फिलहाल उन सभी दस्तावेजों और साहित्य की जांच कर रही है जो मौके से बरामद हुए हैं।
एक दिलचस्प वाकया यह भी सामने आया कि जब हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने वहां मौजूद लोगों को गुमराह होने से बचाने की कोशिश की और उन्हें हनुमान चालीसा पढ़ने को कहा, तो वे उसे ठीक से पढ़ नहीं पाए। कार्यकर्ताओं का कहना है कि लोगों को पूरी तरह से भ्रमित कर दिया गया था। जांच में यह भी पता चला है कि प्रार्थना सभा आयोजित करने वाली महिला का पति सरकारी नौकरी में है।
पुलिस अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि इस पूरे गिरोह के पीछे किन विदेशी ताकतों या संस्थाओं का हाथ है और इसके लिए फंडिंग कहां से आ रही थी।


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