जस्टिस यशवंत वर्मा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका: चुनौती देने वाली याचिका की खारिज:
संवाददाता
16 January 2026
अपडेटेड: 4:13 PM 0thGMT+0530
जस्टिस यशवंत वर्मा को सुप्रीम कोर्ट से लगा बड़ा झटका:
इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है।
दरअसल यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस दीपांकर दत्त और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने आज शुक्रवार को जस्टिस वर्मा की याचिका खारिज कर दी ,जिसे लोकसभा स्पीकर द्वारा गठित कमेटी के द्वारा दाखिल की गई थी।
जस्टिस वर्मा द्वारा दी गई दलील:
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जस्टिस वर्मा के खिलाफ संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था । इस प्रस्ताव के स्वीकार करने के बाद जस्टिस वर्मा को पद से हटा दिया गया। जिसे लोकसभा स्पीकर ओमप्रकाश बिरला ने एक कमेटी द्वारा गठित कर किया गया था।
जस्टिस वर्मा ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए दलील दी कि पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल को सुरक्षित नहीं किया तो उन्हें महाभियोग का सामना क्यों करना चाहिए । क्योंकि वे उस घटनास्थल पर पहुंचने वाले पहले व्यक्ति नहीं थे।
उन्होंने कहा कि पुलिस और फायर ब्रिगेड दोनों ही घटना स्थल पर मौजूद थे। और उन्होंने शुरुआत में कोई भी सुरक्षा और जरूरी कार्रवाई नहीं की। इस वजह से घटनास्थल में सुरक्षा में होने वाली चूक से उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
इस महाभियोग के खिलाफ संसद की ओर से कमेटी बनाई गई । जिसे सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस वर्मा ने चुनौती याचिका लगाई थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा को पद से हटाने के लिए लोकसभा स्पीकर द्वारा 3 सदस्यीय जांच समिति को चुनौती देते हुए जस्टिस वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट पर याचिका दाखिल की थी।
जस्टिस वर्मा की दलील थी कि उनके मामले में इंक्वारी एक्ट 1968 की प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। जिसे सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा और राज्यसभा के सचिवालय को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था।
आईए जाने जस्टिस वर्मा की याचिका का क्या है मामला:
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इलाहाबाद हाई कोर्ट में जज जस्टिस यशवंत वर्मा के नई दिल्ली स्थित सरकारी आवास में जला हुआ कैश मिला था। जिसमें उन्हें पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई थी।
इसमें लोकसभा स्पीकर की ओर से तीन सदस्य जांच कमेटी बताई गई थी, जिसके द्वारा उन्हें पद से बर्खास्त कर दिया गया था।
जस्टिस यशवंत वर्मा ने इस कमेटी को अवैध बताया और सुप्रीम कोर्ट में महाभियोग प्रक्रिया को चुनौती देते हुए याचिका दाखिल की।
लोकसभा स्पीकर के फैसले को चुनौती देने वाली इस याचिका को आज सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है।