26 मई 2026

वाशिंग्टन:

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ रिश्तों को सुधारने की दिशा में एक बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने ईरान के साथ संभावित समझौते को ‘अब्राहम समझौते’ से जोड़ते हुए कहा है कि खाड़ी और इस्लामिक देशों को अब इजरायल के साथ अपने संबंध सामान्य करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। खबर है कि दोनों पक्षों के बीच 14 बिंदुओं वाले एक समझौते के मसौदे पर सहमति बनाने के लिए कतर की मध्यस्थता में बातचीत चल रही है।
इस बीच, ईरान की तरफ से भी सकारात्मक संकेत मिले हैं। ईरान ने दावा किया है कि पिछले 24 घंटों के दौरान उसने होर्मुज स्ट्रेट पार करने वाले 32 मालवाहक जहाजों और पांच तेल टैंकरों को सुरक्षित रास्ता दिया है। इस समझौते की उम्मीद बढ़ते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में चार प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। तेल के दाम पिछले दो हफ्तों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं और यह 100 डॉलर प्रति बैरल से भी नीचे आ गया है। इसके साथ ही, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने अपने देश में लगा इंटरनेट प्रतिबंध हटाने का आदेश दे दिया है, जिसके बाद वहां 87 दिनों से बंद इंटरनेट सेवा फिर से बहाल हो गई है।
ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर दी जानकारी, कई देशों से की बात
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने सोमवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर बताया कि उन्होंने कतर, सऊदी अरब, पाकिस्तान, मिस्र, जॉर्डन और यूएई समेत कई देशों के नेताओं से इस मुद्दे पर बातचीत की है। उन्होंने इन सभी देशों से इस ऐतिहासिक अब्राहम समझौते में शामिल होने की अपील की है। हालांकि, सऊदी अरब ने अभी तक इस समझौते में शामिल होने के स्पष्ट संकेत नहीं दिए हैं। वहीं, पाकिस्तान को भी इजरायल के साथ रिश्ते सामान्य करने के इस प्रस्ताव से आपत्ति है। एक तरफ जहां पाकिस्तान ने ट्रंप के इस आइडिया को खारिज कर दिया है, वहीं इजरायल की तरफ से भी अभी आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है।
बातचीत फेल हुई तो हो सकते हैं नए हमले: ट्रंप की चेतावनी
ट्रंप का कहना है कि अगर ईरान अमेरिका के साथ समझौता करता है, तो उसे भी इस ऐतिहासिक वैश्विक गठबंधन का हिस्सा बनने का मौका मिलना चाहिए। उन्होंने साफ किया कि अमेरिका लंबे समय से पश्चिम एशिया की उलझी हुई परिस्थितियों को सुलझाने का प्रयास कर रहा है। इसके साथ ही उन्होंने यह चेतावनी भी दे डाली कि अगर यह बातचीत किसी वजह से फेल होती है, तो क्षेत्र में नए हमले शुरू हो सकते हैं। उनके मुताबिक, या तो यह अब तक का सबसे बड़ा समझौता साबित होगा, या फिर कोई समझौता नहीं होगा।

कतर से पिछड़ा पाकिस्तान और कूटनीतिक हलचल
इस पूरे घटनाक्रम के बीच ईरान के उप विदेश मंत्री माजिद तख्त रवांची ने भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री से सोमवार को फोन पर चर्चा की है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि दोनों अधिकारियों के बीच क्षेत्रीय घटनाक्रम और द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े अहम मुद्दों पर बातचीत हुई है। दूसरी तरफ, कतर की मध्यस्थता में हो रही इस बातचीत में ईरानी संसद के प्रमुख एमर गालीबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराक्शी सोमवार को कतर पहुंचे, जहां उन्होंने कतर के प्रधानमंत्री के साथ जलडमरूमध्य की सुरक्षा और संभावित शांति समझौते पर चर्चा की।
इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू की चिंताएं
इधर, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक निजी बातचीत में माना है कि ईरान के मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसलों को प्रभावित करना इजरायल के लिए आसान नहीं रह गया है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, नेतन्याहू ने अपने करीबी सहयोगियों से कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही इस सीधी बातचीत में इजरायल की भूमिका अब बेहद सीमित होकर रह गई है।

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