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25 मई 2026

नई दिल्ली:

डिजिटल तकनीक का खतरनाक इस्तेमाल, दिल्ली धमाके के आरोपियों ने रॉकेट और बम बनाने के लिए चैटजीपीटी और यूट्यूब से सीखी थी तरकीब, एनआईए की चार्जशीट में बड़ा खुलासा

राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के पास हुए कार धमाके के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए ने एक बहुत बड़ा और हैरान करने वाला खुलासा किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, अल-कायदा से जुड़े आतंकी मॉड्यूल के आरोपियों ने कथित तौर पर चैटजीपीटी और यूट्यूब जैसी आधुनिक डिजिटल तकनीकों का इस्तेमाल करके रॉकेट और आईईडी (विस्फोटक) बनाने की पूरी जानकारी जुटाई थी।
साढ़े सात हजार पन्नों की चार्जशीट में बड़ा दावा
एनआईए ने इस मामले में 14 मई को विशेष अदालत के सामने 7,500 पन्नों की एक बेहद विस्तृत चार्जशीट दाखिल की है। इस चार्जशीट में दावा किया गया है कि आरोपियों ने बहुत ही शातिर तरीके से लेबोरेटरी-ग्रेड फार्मूले का इस्तेमाल करके खतरनाक विस्फोटक तैयार किए थे। इन विस्फोटकों को बनाने के बाद आरोपियों ने इनका बकायदा टेस्ट भी किया था। यह परीक्षण जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के घने जंगलों में अंजाम दिया गया था।
चैटजीपीटी पर सर्च करता था मुख्य आरोपी
जांच एजेंसी की पड़ताल में यह बात सामने आई है कि इस पूरे मामले के मुख्य आरोपियों में शामिल जासिर बिलाल वानी नाम का शख्स चैटजीपीटी और यूट्यूब पर लगातार संदिग्ध चीजें सर्च कर रहा था। वह इंटरनेट पर रॉकेट कैसे बनाएं और विस्फोटकों का मिश्रण किस अनुपात में तैयार किया जाए जैसे बेहद संवेदनशील और खतरनाक सवाल पूछकर जानकारी जुटा रहा था।
बन चुका था इन-हाउस इंजीनियर
एनआईए के अधिकारियों का कहना है कि जासिर बिलाल वानी इस कदर तकनीक का इस्तेमाल सीख चुका था कि वह आतंकी संगठन अंसार गजवत-उल-हिंद मॉड्यूल का एक तरह से इन-हाउस इंजीनियर बन बैठा था। वह संगठन के भीतर ही रहकर इस तरह के तकनीकी और खतरनाक कामों को अंजाम देने लगा था। फिलहाल इस खुलासे के बाद सुरक्षा एजेंसियां तकनीक के इस गलत इस्तेमाल को लेकर और भी ज्यादा सतर्क हो गई हैं।


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