13 मई 2026

नई दिल्ली:
नई दिल्ली के गोविंदपुरी इलाके की झुग्गियों के बीच चलने वाले कथा लैब स्कूल ने अपनी पढ़ाई के अनोखे अंदाज से पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। हाल ही में इस स्कूल को टी4 एजुकेशन द्वारा ग्लोबल स्कूल्स प्राइज की टॉप 10 श्रेणियों में से कला, संस्कृति और रचनात्मकता की श्रेणी के लिए दुनिया के सर्वश्रेष्ठ 50 स्कूलों में चुना गया है। यह स्कूल उन बच्चों के लिए उम्मीद की एक किरण बनकर उभरा है जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं।
इस स्कूल की सबसे बड़ी खूबी यहाँ की शिक्षण पद्धति है, जिसे स्टोरी पेडागॉजी कहा जाता है। यहाँ बच्चों को किताबों का रट्टा नहीं लगवाया जाता, बल्कि उन्हें कहानियों, गानों, नाच-गाने और कला के जरिए गणित, विज्ञान और पर्यावरण जैसे विषय समझाए जाते हैं। स्कूल का मानना है कि पढ़ाई केवल परीक्षा तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इससे बच्चों में एक जिम्मेदार नागरिक बनने के गुण विकसित होने चाहिए। यहाँ बच्चे रोबोट के मॉडल बनाने से लेकर संगीत और नृत्य के जरिए कठिन सवालों को हल करना सीखते हैं।
कथा लैब स्कूल का सफर साल 1990 में गीता धर्मराजन द्वारा सिर्फ पांच बच्चों के साथ शुरू किया गया था। वर्तमान में यहाँ लगभग 600 बच्चे पढ़ रहे हैं और अब तक 2.5 लाख से ज्यादा लोग इस स्कूल की मुहिम से जुड़कर लाभ उठा चुके हैं। स्कूल की डायरेक्टर रीता सुब्बा के अनुसार, यहाँ की पढ़ाई का स्तर इतना बेहतर है कि हर साल 56 प्रतिशत से ज्यादा छात्र उच्च शिक्षा के लिए बड़े कॉलेजों में दाखिला पाते हैं।
यह संस्थान केवल स्कूली शिक्षा तक ही सीमित नहीं है। यहाँ 18 साल से अधिक उम्र के बाहरी युवाओं के लिए प्रोफेशनल कोर्स भी चलाए जाते हैं। युवाओं को कोडिंग, वेब टेस्टिंग, कंप्यूटर, बेकरी, आईटी और रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों में ट्रेनिंग दी जाती है, ताकि वे रोजगार पा सकें और आत्मनिर्भर बन सकें। कथा एनजीओ द्वारा संचालित यह स्कूल दिल्ली के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, हरियाणा और तमिलनाडु में भी शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहा है। यहाँ के बच्चों की रचनात्मकता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की कई प्रतियोगिताओं में पुरस्कार भी जीत चुके हैं।