धूमधाम से मनाया नर्मदा का प्रकटोत्सव:मां नर्मदा को अर्पित की 351 फीट की चुनरी:
संवाददाता
26 January 2026
अपडेटेड: 2:17 PM 0thGMT+0530
नर्मदा जयंती में मोहन यादव उज्जैन से वर्चुअल जुड़े:
नर्मदा जयंती महोत्सव पर रविवार को सेठानी घाट पर महा आरती का आयोजन किया गया। इस दौरान महाकाल लोक की तर्ज पर नर्मदा लोक निर्माण की सौगात मिली। नर्मदा लोक और प्रदूषण मुक्त करने जल निकासी संरचना की आधारशिला भी रखी गई। कार्यक्रम में सीएम मोहन यादव उज्जैन से वर्चुअल जुड़े । सेठानी घाट पर बने जल मंच से परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सीएम के प्रतिनिधि के रूप में मौजूद रहे। कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए । वर्चुअल भाषण में सीएम ने कहा कि 20 करोड़ से नर्मदा लोग 15 करोड़ से जल निकासी संरचना बनाई जाएगी। इससे श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ेगी उन्होंने कहा कि नर्मदापुरम में तेजी से विकास किया जा रहा है । इसमें कोई कमी नहीं आएगी।
प्रसिद्ध तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर में आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। दोपहर ठीक 12:00 बजे मात् नर्मदे हर के जय घोष से समूचा नर्मदा तट गूंज उठा। लाखों की संख्या में श्रद्धालु नर्मदा स्नान ,पूजन अर्चन के लिए ओंकारेश्वर ,खेड़ी घाट ,नाव घाट खेड़ी और मोरटक्का के नर्मदा तट पर पहुंचे।
खंडवा इंदौर इच्छापुर सड़क मार्ग पर नाव घाट, खेड़ी घाट, नर्मदा की घाटों पर हजारों की उपस्थिति में मां नर्मदा की 108 दीपों से भव्य संगीतमय महा आरती हुई और आसमान से हेलीकॉप्टर द्वारा पुष्प वर्षा की गई। जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं की अपार भीड़ के आगे नावखेड़ी स्थित उत्तर तक मार्ग छोटा पड़ गया। घाटों तक पहुंचने वाले सभी मार्गों पर दूर-दूर तक केवल मां नर्मदा के ही भक्त नजर आ रहे थे। भीड़ के चलते प्रवेश मार्ग से लेकर घाट तक जन सैलाब उमड़ पड़ा था। ओंकारेश्वर, ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के ठीक सामने रामघाट गोमुख घाट पर जय मां नर्मदा युवा संगठन द्वारा वैदिक विधि विधान से मां नर्मदा जयंती उत्सव मनाया गया । प्रिय जनों द्वारा दोपहर 12:00 से मां नर्मदा का श्रद्धा के साथ 251 लीटर दूध से अभिषेक संपन्न कराया गया । नर्मदा नदी में नाव के संचालन पर प्रतिबंध के कारण इस वर्ष श्रद्धालु मां नर्मदा को चुनरी अर्पित नहीं कर सके । जिससे लोगों में नाराजगी भी देखने को मिली। वहीं श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन ने नए झूला पुल से मंदिर जाने पर प्रतिबंध लगाकर सभी पुजारी श्रद्धालुओं को झूला पुल से आवागमन कराया।