नई परिवहन नीति के विरोध में बस ओनर्स एसोसिएशन का विरोध– 2 मार्च को थमेंगे बसों  के पहिए:

khabar pradhan

संवाददाता

27 February 2026

अपडेटेड: 4:57 PM 0thGMT+0530

नई परिवहन नीति के विरोध में बस ओनर्स एसोसिएशन का विरोध– 2 मार्च को थमेंगे बसों  के पहिए:

नई परिवहन नीति के विरोध में बस ओनर्स एसोसिएशन का विरोध– 2 मार्च को थमेंगे बसों  के पहिए:

मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत नई परिवहन नीति लागू:
मध्य प्रदेश बस ओनर्स एसोसिएशन को रास नहीं आ रही नई नीति:
प्रदेश में मनमर्जी बस दौड़ा रहे ऑपरेटरों पर लगाम लगाने के लिए सरकार मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत नई परिवहन नीति लागू करने जा रही है । लेकिन यह मध्य प्रदेश बस ओनर्स एसोसिएशन को रास  नहीं आ रहा।  इसके विरोध में संगठन में एक मोर्चा खोल दिया है यात्रियों के हितों की आड़ में खुद पर लगाने वाली लगाम से बचने के लिए संगठन ने होली से 2 दिन पहले 2 मार्च को पूरे प्रदेश में बसों के पहिए रोकने की घोषणा की है।

संगठन क्यों कर रहा विरोध:
संगठन का कहना है कि नई नीति में सरकारी कंपनी बसें  नियंत्रित करेगी।  अभी एक रुपए 25 पैसे प्रति किलोमीटर के हिसाब से बसें दौड़ रही है । नई कंपनी बनने पर यह 1रुपये75 पैसे प्रति किलोमीटर हो जाएगा।
इससे यात्रियों पर भार पड़ेगा।
नई नीति में सरकार बसों से अनुबंध करेगी ,रूट और किराया तय करेगी, ऐसे में यात्रियों को समय पर सुरक्षित सेवा मिल सकेगी । ऑपरेटर सिर्फ बस चलाएंगे।  इससे उनका एकाधिकार खत्म होगा ।
ऑपरेटर किराएदार की तरह रह जाएंगे।  नियम तोड़ने पर सरकार अनुबंध खत्म कर देगी।  इसलिए बस ऑपरेटर इस नीति को गलत ठहरा रहे हैं।
ऑपरेटर में यह डर है कि मनमर्जी रूट नहीं मिलेगा ,किराए में मनमानी भी नहीं चलेगी ,ओवरलोडिंग बंद हो जाएगी ,जितनी सीटें उतनी ही यात्री।
जिससे ज्यादा सवारी नहीं बैठा पाएंगे।
बस में जरा भी लापरवाही हुई तो सीधे डिजिटल निगरानी से शासन की नजर में आ जाएंगे।
यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को देखते हुए मुख्यमंत्री सुगम परिवहन योजना के तहत नई परिवहन नीति लाई गई है किंतु ऑनर्स एसोसिएशन इस का विरोध कर रही है जिसके कारण 2 मार्च को संगठन ने बस ना चलाने का ऐलान किया है।

अभी क्या चल रहा है सिस्टम:
कई जिलों में बस ऑपरेटर वर्षों से लाभकारी रोड पर बस दौड़ा रहे हैं।  जहां यात्री कम है ,वहां बस नहीं चलाते । त्योहारों पर भीड़ बढ़ने पर किराया बढ़ा देते हैं । ओवरलोडिंग बहुत ज्यादा देखी जाती है ।‌बसों में सामान भी ढोकर ले जाते हैं।  कई बार किसी रोड पर न जाने के बाद भी यात्रियों को धोखे से बस में चढ़ाते हैं, फिर अपने स्टॉपेज पर उतार कर दूसरी बस से जाने को भी विवश करते हैं।
फिटनेस बीमा ना होने पर भी  बस दौड़ा रहे हैं । ऐसे में हादसे होने पर लोगों की जान जा रही है।  जानकारी के अनुसार वर्तमान व्यवस्था में सरकारी नियंत्रण कम माना जा रहा है।

नई नीति से क्या होगा आम जनों को लाभ:
*किराया और रूट सरकार तय करेगी, जिसमें टाइम टेबल का पालन करना अनिवार्य होगा।
*अनुबंध आधारित भुगतान मॉडल लागू होगा ।
*बसों में डिजिटल मॉनिटरिंग होगी । इससे ऑपरेटर बसों में क्षमता से ज्यादा यात्रियों को नहीं चढ़ा सकेंगे।
* ओवरलोडिंग की समस्या खत्म होगी।  नियम तोड़ने पर तत्काल सरकार की कार्रवाई होगी।
*ऑपरेटर की स्वतंत्रता कमाई का दायरा सिमट जाएगा।

यात्रियों की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी होगी:
इससे यात्रियों को समय पर सुरक्षित और पारदर्शी सेवा मिलेगी।  इसका पूरा नियंत्रण सरकार का होगा।  किसी भी परेशानी होने पर सरकार की जिम्मेदारी होगी।  बस ऑपरेटर की मर्जी से नहीं नियम से चलेगी।  ऑपरेटर मनमर्जी सामान लोड नहीं कर सकेंगे। ओवरलोडिंग बंद होगी, जिससे हादसों की आशंका कम होगी।‌ सार्वजनिक बस सेवा पर लोगों का भरोसा बढ़ेगा।  जिस रूट पर यात्री कम है, वहां भी बस सुविधा मिलेगी ,जिससे ग्रामीणों को राहत मिलेगी।

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