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8 जुलाई 2026:
मध्य प्रदेश भोपाल:

नर्मदा और सरदार सरोवर परियोजना को लेकर दशकों से चला आ रहा विवाद अब खत्म हो गया है।  मध्य प्रदेश समेत गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के बीच लंबित भुगतान को लेकर बड़ा समझौता हुआ है।  गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में चारों राज्यों ने वन टाइम सेटलमेंट के तहत एमओयू साइन किया। इस समझौते से परियोजना की लागत और पुनर्वास से जुड़े पुराने भुगतान मामलों का समाधान होगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि नर्मदा परियोजना मध्य प्रदेश के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इससे प्रदेश में सिंचाई, बिजली और उद्योगों के लिए पानी की व्यवस्था मजबूत हुई है। दरअसल, सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई बढ़ने के बाद मध्य प्रदेश का करीब 4800 हेक्टेयर क्षेत्र डूब क्षेत्र में चला गया था। इसके मुआवजे को लेकर राज्य लंबे समय से गुजरात से भुगतान की मांग कर रहा था । अब  समझौते के बाद पुराने दावे खत्म कर दिए गए हैं।‌
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे बताया बड़ी उपलब्धि:
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा यह मामला 30 से 40 वर्षों से लंबित पड़ा था जिसे सफलतापूर्वक निपटाया गया है। कि समझौते के तहत सरदार सरोवर परियोजना के कुल खर्च का 75% हिस्सा गुजरात सरकार बहन करेगी और मध्य प्रदेश सरकार गुजरात को 270 करोड रुपए का भुगतान करेगी।

इस विवाद  के समाप्त होने के साथ ही मध्य प्रदेश, गुजरात राजस्थान और महाराष्ट्र के बीच एक बेहतर समन्वय स्थापित होगा और विकास कार्यों की प्रगति में गति मिलेगी। यह समझौता नई दिल्ली में हुआ और इस समझौते पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटील की मौजूदगी में मध्य प्रदेश, गुजरात राजस्थान और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने हस्ताक्षर किए। आपको बता दें कि यह विवाद सरदार सरोवर परियोजना में विस्थापन भूमि अधिग्रहण मुआवजा और अन्य वित्तीय दायित्वों के बंटवारों को लेकर कई वर्षों से चल रहा था। अब अब इन चारों राज्यों ने एक समझौते के तहत लंबित वित्तीय दावे और देनदारी के निपटारे पर सहमत जताई है।


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