18 अप्रैल 2026

नई दिल्ली:
महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन विधेयक) के लोकसभा में गिरने के बाद राजनीति पूरी तरह गरमा गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस नाकामी के लिए सीधे तौर पर विपक्षी दलों को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि देश की ‘मातृशक्ति’ इस अपमान का हिसाब मांगेगी और आने वाले समय में विपक्ष को कहीं रास्ता नहीं मिलेगा।

विपक्ष पर तीखा प्रहार
लोकसभा में चर्चा का जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा कि आज देश की करोड़ों महिलाएं देख रही हैं कि उनकी प्रगति के रास्ते में रोड़ा कौन अटका रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब महिलाएं अपने हक का हिसाब मांगेंगी, तो विपक्ष के पास छिपने की जगह नहीं बचेगी।
एससी-एसटी सीटों का नुकसान
गृह मंत्री ने एक महत्वपूर्ण बिंदु उठाते हुए कहा कि यदि यह विधेयक पास हो जाता और परिसीमन की प्रक्रिया आगे बढ़ती, तो जनसंख्या के अनुपात में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की सीटों में भी इजाफा होता। बिल रुकने से इन वर्गों का भी हक मारा गया है।
कांग्रेस पर पुरानी साजिश का आरोप
अमित शाह ने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि ये वही पार्टियां हैं जो 1996 से लगातार किसी न किसी बहाने महिलाओं के आरक्षण को रोकती आई हैं। उन्होंने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि साल 2010 में राज्यसभा से बिल पास होने के बावजूद इसे लोकसभा में न लाने के पीछे कांग्रेस और यूपीए (संप्रग) सरकार की सोची-समझी साजिश थी।
मोदी सरकार का संकल्प
अमित शाह ने साफ कर दिया कि सरकार इस हार से पीछे हटने वाली नहीं है। उन्होंने दोहराया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार महिलाओं को उनका हक दिलाने के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगी। उन्होंने परिसीमन को पूरी तरह संवैधानिक बताया और कहा कि सरकार महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देकर ही दम लेगी।

संसद में 21 घंटे की लंबी बहस और 130 सांसदों के विचारों के बाद भी बिल का  गिरना अब एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनता दिख रहा है। जहाँ राहुल गांधी इसे संविधान बचाने की जीत कह रहे हैं, वहीं अमित शाह ने इसे महिलाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करार दिया है। अब देखना यह है कि जनता इस सियासी खींचतान को किस नजरिए से देखती है।