15 अप्रैल 2026
भोपाल:
मध्य प्रदेश के पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने दूध उत्पादन बढ़ाने और पशुपालकों की कमाई में इजाफा करने के लिए ‘गोरस मोबाइल ऐप’ तैयार किया है। इस ऐप का मकसद पशुपालन को वैज्ञानिक तरीके से जोड़ना है ताकि ग्रामीण इलाकों के किसान भी घर बैठे अपने पशुओं का बेहतर ख्याल रख सकें।
कम पढ़े-लिखे लोग भी आसानी से कर सकेंगे इस्तेमाल
इस ऐप की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे पूरी तरह हिंदी भाषा में बनाया गया है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि जो पशुपालक कम पढ़े-लिखे हैं, वे भी इसे आसानी से चला सकें। इसके अलावा, यह ऐप बिना इंटरनेट के भी काम कर सकता है, जो दूर-दराज के गांवों में रहने वाले किसानों के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा।
ऐप से होने वाले मुख्य फायदे
सही आहार की जानकारी: ऐप में पशु की नस्ल, वजन और उम्र दर्ज करने पर यह खुद बताएगा कि उसे कितना और कैसा चारा देना चाहिए।
दूध उत्पादन में बढ़ोत्तरी: अक्सर गलत खान-पान की वजह से दूध उत्पादन 20 से 30 प्रतिशत तक गिर जाता है। यह ऐप वैज्ञानिक तरीके से आहार चार्ट बनाकर इस समस्या को दूर करेगा।
नस्ल सुधार पर जोर: इसमें गिर, साहिवाल, थारपारकर और मुर्रा जैसी खास नस्लों के रखरखाव के लिए अलग से गाइडेंस दी गई है।
आर्थिक लाभ का हिसाब: ऐप यह भी बताएगा कि चारे में सुधार करने से एक ब्यात (सीजन) में किसान को कितना अतिरिक्त मुनाफा हो सकता है।
पशुओं की सेहत और मौसम का रखेगा ध्यान
अक्सर पशुपालकों को इस बात की चिंता रहती है कि उनके पशु बार-बार बीमार क्यों हो रहे हैं या गर्भधारण में दिक्कत क्यों आ रही है। ‘गोरस ऐप’ पशुओं के स्वास्थ्य और उनकी गर्भावस्था की स्थिति पर सटीक सलाह देगा। साथ ही, बदलते मौसम के हिसाब से पशुओं के चारे में क्या बदलाव करने चाहिए, इसकी जानकारी भी ऐप में अपने आप अपडेट हो जाएगी।
कहाँ से करें डाउनलोड?
विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव के अनुसार, यह ऐप जल्द ही गूगल प्ले स्टोर पर मुफ्त में उपलब्ध होगा। पशुपालक इसे डाउनलोड करके 28 से अधिक स्थानीय चारे की वैरायटी और उनके सही मिश्रण की जानकारी ले सकेंगे।
इस तकनीक के आने से उम्मीद है कि मध्य प्रदेश के पशुपालक अब सिर्फ पारंपरिक तरीके पर निर्भर न रहकर आधुनिक और मुनाफे वाली डेयरी फार्मिंग की ओर बढ़ सकेंगे।


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