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30 मई 2026

नई दिल्ली:
भारत के पहाड़ी राज्यों के जंगलों से एक बेहद ही चिंताजनक खबर सामने आ रही है। इस समय हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के अलग-अलग हिस्सों में वनाग्नि (जंगलों की आग) ने भयानक रूप अख्तियार कर लिया है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि ये लगातार बढ़ती गर्मी, कम बारिश और तेज हवाओं के कारण आग पर काबू पाना बेहद मुश्किल साबित हो रहा है।
कई इलाकों में आसमान में धुएं की इतनी मोटी परत छा गई है कि लोगों को सांस लेने में भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वन विभाग, स्थानीय प्रशासन और देश की सुरक्षा एजेंसियां मिलकर दिन-रात इस आग को बुझाने के काम में जुटी हुई हैं। कुछ इलाकों में तो स्थिति इतनी बिगड़ गई कि सेना और वायुसेना की मदद भी लेनी पड़ी है। मौसम विशेषज्ञों की मानें तो अगर मौसम में जल्द ही कोई बदलाव या बारिश नहीं हुई, तो स्थिति और भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

उत्तराखंड में सैकड़ों घटनाएं, बढ़ा खतरा
उत्तराखंड के जंगलों में इस साल वनाग्नि की सैकड़ों घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं। राज्य के विभिन्न जिलों के जंगलों में लगी यह आग इतनी तेजी से फैल रही है कि अब यह इंसानी आबादी वाले रिहायशी इलाकों के करीब तक पहुंच चुकी है, जिससे स्थानीय लोगों में डर का माहौल है। अब तक की रिपोर्ट के अनुसार, कुल मिलाकर 340 हेक्टेयर से भी ज्यादा वन क्षेत्र इस आग की चपेट में आकर पूरी तरह नष्ट हो चुका है।
हिमाचल प्रदेश के कसौली में वायुसेना ने संभाला मोर्चा
हिमाचल प्रदेश के कसौली क्षेत्र के जंगलों में लगी आग काफी समय से धधक रही थी। वन क्षेत्र के साथ-साथ आसपास के संवेदनशील और रिहायशी इलाकों के लिए पैदा हुए खतरे को देखते हुए स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारतीय वायुसेना को राहत एवं बचाव अभियान में शामिल किया गया। वायुसेना के हेलीकॉप्टरों ने प्रभावित इलाकों में लगातार पानी का छिड़काव किया, जिससे आग को आगे बढ़ने से रोकने में बड़ी कामयाबी मिली। प्रशासन का मानना है कि इस हवाई सहायता के मिलने से जंगलों और वन्यजीवों को होने वाले नुकसान को काफी हद तक सीमित किया जा सका है।
जम्मू-कश्मीर में कई दिनों से जारी है संघर्ष
जम्मू-कश्मीर के उधमपुर और रामबन जिलों में भी कई दिनों से जंगलों की आग धधक रही है। इस वनाग्नि की वजह से वन क्षेत्र और वन्यजीवों को भारी नुकसान पहुंचा है। हालात इतने नाजुक हैं कि कुछ ग्रामीण इलाके और गाँव भी इस आग की जद में आ गए हैं। पहाड़ी और दुर्गम इलाका होने की वजह से राहत कार्यों और संसाधनों को वहां तक पहुंचाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद, स्थानीय लोग और वन विभाग के कर्मचारी मिलकर आग बुझाने के प्रयास में जुटे हुए हैं। हालांकि, लगातार चलने वाली तेज हवाएं आग को बार-बार नए क्षेत्रों में फैला देती हैं, जिसके कारण स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में लाने में काफी वक्त लग रहा है।


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