प्रमोशन में आरक्षण के मामले की सुनवाई आज 27 जनवरी को:

khabar pradhan

संवाददाता

27 January 2026

अपडेटेड: 1:57 PM 0thGMT+0530

प्रमोशन में आरक्षण के मामले की सुनवाई आज 27 जनवरी को:

जबलपुर हाई कोर्ट:
प्रमोशन में आरक्षण मामले में अब तक 15 बार हाईकोर्ट में सुनवाई हो चुकी है । जिसमें 2025 के प्रमोशन नियम के खिलाफ 26 जून 2025 को याचिका दर्ज हुई थी। जिसमें इस मामले की पहली सुनवाई 7 जुलाई 2025 को हुई थी।
अब तक इसमें 46 याचिकाएं दर्ज की जा चुकी है।

7 जुलाई 2025 की सुनवाई में चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच में महाधिवक्ता से पूछा गया था कि क्या सरकार इस बीच कोई विभागीय प्रमोशन कमेटी आयोजित करेगी।
इस जब तक यह मामला लंबित है तब तक कोई भी कमेटी इस मामले में निर्णय नहीं लेगी। और कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद से अभी तक कोई पदोन्नति नहीं की गई है।
और हजारों कर्मचारियों के लिए प्रमोशन पर पूर्ण विराम लग गया है।  पिछले 7 महीना से इस मामले में हाई कोर्ट में करीब 15 बार सुनवाई हो चुकी है।

हालांकि इस दौरान  कोई लिखित आर्डर जारी नहीं हुआ । फिर भी कोर्ट की टिप्पणी के बाद से अभी तक कोई पदोन्नति नहीं की गई है।
प्रमोशन में आरक्षण मामले में सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि मध्य प्रदेश में 54 विभागों में 1500 कैडर है और याचिका कर्ताओं में से कोई भी प्रमोशन से प्रभावित नहीं हुआ है।  कोर्ट ने छह विभागों का उदाहरण दिया गया था, जिसमें वेटरनरी ,पब्लिक हेल्थ, फॉरेस्ट और उद्यानिकी शामिल थे। सरकार की तरफ से यह बताया गया कि ऐसा कोई भी कर्मचारी नहीं है जो प्रमोशन में आरक्षण से प्रभावित हो और उसने याचिका दायर की हो।
कोर्ट को यह बताया गया कि आरक्षित वर्ग का प्रतिनिधित्व पूरे पदों में नहीं बल्कि कैडर के अनुसार तय किया जाता है।  इसलिए बिना जांचे प्रमोशन में आरक्षण लागू करने के आरोप गलत है।


6 जनवरी की सुनवाई के बाद करीब करीब बहस पूरी हुई:
आरक्षण में प्रमोशन संबंधी मामले की सुनवाई 6 जनवरी 2026 को पूरी हो गई थी । इसमें करीब करीब सभी पक्षों की ओर से विस्तृत बहस की गई थी।  जिसमें अपाक्स  संगठन की ओर से क्रीमी लेयर ,आरक्षण की सीमा, डाटा की अनिवार्यता और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन को गंभीर चुनौतियां दी गई थी।  इस वजह से कोर्ट ने फैसला नहीं दिया था और सुनवाई 13 जनवरी तक टाल दी गई थी।
आरक्षित वर्ग ने 2025 के 11 और 12 के प्रमोशन नियम को असंवैधानिक बताया था और फिर नई याचिकाएं कोर्ट में दाखिल कर दी गई, जिससे यह मामला काफी गंभीर हो गया।
याचिकाओं में यह मुद्दा उठाया गया की सुप्रीम कोर्ट ने 17 मई 2018 को प्रमोशन की अनुमति दी थी।  याचिकाकर्ता का आरोप है कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की गलत व्याख्या की ,जिससे प्रमोशन रोके गए।

अब एक बार फिर  27 जनवरी को इस मामले में सुनवाई होना है जिसे निर्णायक माना जा रहा है।
यह मामला गंभीर है फैसला तुरंत करना कोर्ट के लिए आसान नहीं होगा।  किंतु जब तक हाई कोर्ट इस मामले में अंतिम निर्णय नहीं देता तब तक प्रमोशन में आरक्षण  पर रोक यथावत रहेगी।

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