20 अप्रैल 2026
नई दिल्ली:
भारत और जर्मनी के बीच रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में संबंधों को एक नई दिशा देने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कल, यानी 21 अप्रैल को जर्मनी के दौरे पर रवाना होंगे। तीन दिनों के इस महत्वपूर्ण दौरे पर राजनाथ सिंह जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस और वहां के अन्य शीर्ष नेताओं के साथ गहन द्विपक्षीय बातचीत करेंगे।
इस दौरे का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच रक्षा औद्योगिक सहयोग को बढ़ाना और भविष्य की चुनौतियों के लिए एक मजबूत रोडमैप तैयार करना है।
रक्षा मंत्री का यह दौरा कई मायनों में खास है। बातचीत के दौरान इन मुख्य बिंदुओं पर फोकस रहने की उम्मीद है:
डिफेंस इंडस्ट्रियल रोडमैप: दोनों देश इस बात पर सहमत हो सकते हैं कि वे मिलकर आधुनिक सैन्य उपकरणों का निर्माण कैसे करें। इसके लिए एक खास ‘रोडमैप’ पर हस्ताक्षर होने की संभावना है।
साइबर सुरक्षा और AI: बदलते समय के साथ साइबर खतरों से निपटने और आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) के सैन्य इस्तेमाल को लेकर भी दोनों देश सहयोग के नए रास्ते तलाशेंगे।
ड्रोन टेक्नोलॉजी: आज के दौर में ड्रोन और मानवरहित विमानों की भूमिका बढ़ गई है। भारत और जर्मनी इस क्षेत्र में तकनीक साझा करने पर चर्चा कर सकते हैं।
सैन्य जुड़ाव: दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी तालमेल बढ़ाने और संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यासों पर भी विचार किया जाएगा।
शांति मिशन और संयुक्त प्रशिक्षण
इस दौरे के दौरान संयुक्त राष्ट्र (UN) शांति अभियानों में प्रशिक्षण और सहयोग के लिए एक कार्यान्वयन व्यवस्था (Implementation Arrangement) पर भी हस्ताक्षर होने की संभावना है। इससे वैश्विक शांति के लिए भारत और जर्मनी मिलकर काम कर सकेंगे।
जर्मनी यूरोप की एक बड़ी आर्थिक और तकनीकी शक्ति है। रक्षा मंत्री के इस दौरे से भारतीय रक्षा उद्योगों को नई तकनीक मिलने में मदद मिलेगी और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को बल मिलेगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उनके जर्मन समकक्ष बोरिस पिस्टोरियस पिछले कुछ समय से चल रहे रक्षा सहयोग की समीक्षा भी करेंगे और भविष्य की रणनीतियों पर मुहर लगाएंगे।
यह यात्रा न केवल सैन्य संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम मानी जा रही है।


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