24 अप्रैल 2026
धार:
मध्य प्रदेश के धार में स्थित भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर कानूनी लड़ाई तेज हो गई है। इंदौर हाई कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद ने कई ऐतिहासिक तथ्य पेश किए। उन्होंने बताया कि राजा भोज के शासनकाल के बाद धार शहर ने कई उतार-चढ़ाव देखे और यह शहर कई बार बाहरी आक्रमणों का शिकार हुआ।
इतिहास का हवाला: आक्रमण और लूटपाट की कहानी
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि साल 1055 में राजा भोज की मृत्यु के बाद लगभग 140 सालों तक धार पर कई हमले हुए।
1. साल 1055-56 के दौरान कर्नाटक के राजा ने धार पर हमला कर वहां भारी तोड़फोड़ की थी।
2. साल 1070 में एक बार फिर बड़ा आक्रमण हुआ, जिसके बाद 1071 से 1074 के बीच शहर के पुनर्निर्माण की कोशिशें की गईं।
3. साल 1133 में गुजरात के राजा ने धार पर हमला कर कब्जा कर लिया था।
4. दलीलों के मुताबिक, जब साल 1305 में मुस्लिम शासक धार पहुंचे, तब तक आक्रमणों की वजह से यह शहर पहले ही खंडहर में तब्दील हो चुका था।
धर्म नहीं, बल्कि सत्ता की लड़ाई थी: वकील सलमान खुर्शीद
मुस्लिम पक्ष के वकील ने तर्क दिया कि धार पर हुए इन हमलों का धर्म से कोई सीधा लेना-देना नहीं था। उनके अनुसार, यह उस दौर के राजाओं के बीच सत्ता और वर्चस्व की जंग थी। उस समय प्रतिद्वंद्वी राजा एक-दूसरे के राज्यों में बने मंदिरों को नुकसान पहुंचाते थे और वहां की मूर्तियों को अपनी विजय के प्रतीक के रूप में अपने साथ ले जाते थे। उन्होंने दावा किया कि बाद में जो भी निर्माण कार्य हुए, उनमें वहां उपलब्ध पुरानी सामग्री का ही इस्तेमाल किया गया था।
एएसआई की दलील और अगली सुनवाई
दूसरी ओर, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने भी अपनी बात रखी। एएसआई की तरफ से वरिष्ठ वकील सुनील जैन ने कोर्ट को बताया कि भोजशाला साल 1904 से ही एक ‘राष्ट्रीय महत्व की संरक्षित धरोहर’ है। इस वजह से इस पर वक्फ एक्ट के नियम लागू नहीं होते।
विवाद का एक हिस्सा यह भी है कि 24 अगस्त 1935 को एक नोटिफिकेशन के जरिए इस विवादित संपत्ति को वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया गया था। फिलहाल दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने अगली तारीख तय कर दी है। इस मामले में अब 27 अप्रैल से नियमित सुनवाई शुरू होगी।


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