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7 अप्रैल 2026
नई दिल्ली:

अगर आपकी आँखें भी मोबाइल और लैपटॉप की स्क्रीन देखते-देखते थक जाती हैं, उनमें जलन या खुजली होती है, तो यह खबर आपके लिए है। दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ने ‘ड्राई आई सिंड्रोम’ के इलाज में एक बड़ी सफलता हासिल की है। वैज्ञानिकों ने पाया है कि मां के दूध में मिलने वाले एक खास प्रोटीन से आँखों का सूखापन हमेशा के लिए खत्म किया जा सकता है।
क्या है यह नई खोज?
एम्स के ‘आरपीसी सेंटर फॉर ऑप्थैल्मिक साइंसेज’ ने एक क्लिनिकल ट्रायल किया है। इस ट्रायल में ‘लेक्टोफेरिन’ (Lactoferrin) नाम के प्रोटीन की गोलियों का इस्तेमाल किया गया।
लेक्टोफेरिन: यह कोई केमिकल नहीं, बल्कि एक प्राकृतिक प्रोटीन है जो मां के दूध में पाया जाता है। यह शरीर की इम्युनिटी बढ़ाता है और सूजन कम करने में मदद करता है।
करीब 200 मरीजों पर किए गए इस टेस्ट में पाया गया कि तीन महीने तक यह दवा लेने से आँखों की नमी (आँसू बनने की क्षमता) और उनकी क्वालिटी में जबरदस्त सुधार हुआ।
क्यों बढ़ रही है यह बीमारी?
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में ड्राई आई सिंड्रोम एक आम समस्या बन गई है। विशेषज्ञों के अनुसार:
लगातार मोबाइल, लैपटॉप और टीवी देखने से पलकें कम झपकती हैं, जिससे आँखें सूखने लगती हैं।
आँखों में जलन, खुजली, चुभन, थकान और धुंधलापन इसके मुख्य संकेत हैं।
अनुमान है कि साल 2030 तक भारत की करीब 45 प्रतिशत शहरी आबादी इस समस्या की चपेट में हो सकती है। सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले लोग 21 से 40 वर्ष की आयु के हैं।
ड्रॉप्स के मुकाबले क्यों बेहतर है यह दवा?
अभी तक ड्राई आई के लिए लोग ‘आर्टिफिशियल टियर्स’ यानी आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन:
आई ड्रॉप्स केवल अस्थायी राहत देते हैं।
लेक्टोफेरिन टैबलेट समस्या की जड़ यानी सूजन और आँसू उत्पादन की कमी पर काम करती है।
यह एक प्राकृतिक प्रोटीन है, इसलिए इसके साइड इफेक्ट्स की संभावना बहुत कम है।
बाजार में कब तक आएगी यह दवा?
एम्स की डॉक्टर नम्रता शर्मा और डॉ. सुजाता शर्मा के नेतृत्व में हुआ यह ट्रायल काफी उत्साहजनक रहा है। हालांकि, अभी यह रिसर्च के चरण में है। रेगुलेटरी मंजूरी और अन्य औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद, इस दवा को आम लोगों के लिए बाजार में आने में एक से डेढ़ साल का समय लग सकता है।


जब तक यह दवा बाजार में नहीं आती, तब तक आप इन छोटी बातों का ध्यान रख सकते हैं:
* 20-20-20 नियम: हर 20 मिनट के स्क्रीन टाइम के बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखें।
* पलकें झपकाएं: काम के दौरान जानबूझकर पलकें झपकाते रहें।
* पानी खूब पिएं: शरीर में पानी की कमी का असर आँखों की नमी पर भी पड़ता है।
चिकित्सा विज्ञान की यह खोज करोड़ों लोगों को चश्मे और बार-बार आई ड्रॉप डालने की झंझट से मुक्ति दिला सकती है। यह शोध भविष्य में कृत्रिम आँसुओं पर हमारी निर्भरता को पूरी तरह खत्म कर सकता है।


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