29 जून 2026:
देश दुनिया/
यूरोप में भीषण गर्मी के कहर से 1300 से अधिक लोगों की मौत:
यूरोप इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है । फ्रांस की स्वास्थ्य एजेंसी ने 1000 से ज्यादा मौतों की पुष्टि की है। मौतों का यह आंकड़ा 1300 से 1500 पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
बताया जा रहा है कि जून में यह हीट वेव शुरू हुई और अब सबसे खतरनाक हीट वेव या गर्मी साबित हो रही है । कई देशों में तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच गया है।
जिसमें बुजुर्ग और कमजोर लोगों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है।
WHO ने जताई चिंता:
वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से यह भीषण गर्मी या हीट वेव है। फ्रांस में सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसी ने चेतावनी दी है कि मौतों की संख्या और भी बढ़ सकती है।
अभी तक अधिकतर मौतें बुजुर्गों की हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 15 करोड लोग भीषण गर्मी में जी रहे हैं। सैकड़ो मौतें हो चुकी हैं, स्कूल कॉलेज बंद है और बिजली के ग्रिड लड़खड़ा रहे हैं।
स्कूल ऑफिस सब हो रहे बंद:
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार जलवायु परिवर्तन पहले पीढ़ी दर पीढ़ी होती थी । अब यह हीट वेव का असर हर साल होने लगा है। जिससे यूरोप के घर, ऑफिस और स्कूल इस भीषण गर्मी से निपटने के लिए तैयार नहीं है। यूरोप की इमारतें बिना एयर कंडीशनिंग के हैं। इस गर्मी के दौरान रात में भी तापमान कम नहीं हो रहा। जिससे लोगों के शरीर को ठंडा होने का मौका नहीं मिल रहा।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि एक लंबे समय तक हाई टेंपरेचर के कारण मानव शरीर के heart,lungs, और brain पर दबाव पड़ता है। और ऐसे लोगों पर ज्यादा खतरा है जिन्हें पहले कोई बीमारियां है।
यूरोप के कई देशों में जर्मनी, पोलैंड, चेक गणराज्य ,ऑस्ट्रेलिया में टेंपरेचर ने सभी पुराने रिकॉर्ड्स को तोड़ दिया है और यहां तापमान 40 डिग्री से ऊपर पहुंच गया है।
बढ़ते तापमान के कारण समुद्री पानी 18 किलोमीटर अंदर तक चला गया है नदियां सूख रही है, उनका पानी गर्म हो रहा है। इससे बिजली उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है । हंगरी के पास न्यूक्लियर पावर प्लांट ने डेन्यूब नदी के पानी के गर्म होने के कारण उसने अपनी क्षमता घटा दी है।
इटली में पो नदी का जल स्तर कम हो गया है।
जिससे कृषि को खतरा पैदा हो गया है। कई लोग गर्मी से बचने के लिए नदी और झीलों में जाने के कारण डूब गए।
भीषण गर्मी के कारण यातायात व्यवस्था ठप हो गई है। जर्मनी और फ्रांस में ट्रेनें कम चल रही है। बिजली ग्रिड पर भारी बोझ आ गया है। क्योंकि कूलिंग की मांग बढ़ गई है।
कई जगह बिजली कटौती हो रही है।
आंधी तूफान की वजह से बिजली की समस्या:
फ्रांस में आंधी और तूफान की वजह से 36000 घरों में बिजली नहीं है। कृषि क्षेत्र भी प्रभावित हो रहा है। फसलों को नुकसान हो रहा है। पशुओं के लिए चारा और पानी की समस्या बढ़ गई है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन ने इस गर्मी को 100 गुना ज्यादा खतरनाक बना दिया है। आज से करीब दो दशक पहले ऐसी स्थितियां बहुत कम होती थी। अब ग्लोबल वार्मिंग की वजह से मौसम खतरनाक हो गया है और यह खतरनाक मौसम तेजी से बढ़ रहा है।
भीषण गर्मी के कारण सड़क और रेल सेवाओं पर हो रहा असर: यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित:
जर्मनी में भीषण गर्मी के कारण अलग-अलग हिस्सों में सड़कों और नेशनल हाईवे के टूटने की खबरें आ रही हैं । भीषण गर्मी के कारण डाबर और विटुमन पिघल गए हैं। यहां तक की पटरिया भी आवागमन के लिए अनुपयुक्त हो गए हैं। इसके कारण ट्राम सेवाएं भी रोक दी गई है। कई जगह सड़कों की कंक्रीट क्षतिग्रस्त हो गई है। लीपजिंग में कंपनियों के अधिक गर्म होने के कारण ट्राम सेवाएं रोक दी गई। हैमबर्ग से प्राग जा रही एक ट्रेन का एयर कंडीशनिंग सिस्टम बंद होने के बाद कारण 600 यात्रियों को बाहर निकलना पड़ा, क्योंकि कई यात्रियों की तबीयत अचानक से बिगड़ने लगी थी। बर्लिन में वाटर कैनन से लोगों को राहत पहुंचाने के लिए पानी का छिड़काव किया गया।
जंगलों की आग भी बन रही बड़ी चुनौती:
जर्मनी की एक बड़े जंगल में आग लगने की खबरें भी मिल रही है। जिससे हालात और गंभीर हो गए हैं। बताया जा रहा है कि इन क्षेत्रों में सेकंड वर्ल्ड वॉर के समय कुछ अविस्फोटिक बम और गोला बारूद दबे होने के कारण लगातार आग का विस्फोट भी हो रहा है। जिससे ला राहत और बचाव कार्य प्रभावित हो रहे हैं।


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