22 जून 2026
अयोध्या के राम मंदिर में सामने आए चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट पूरी तरह तैयार कर ली है. उच्च पदस्थ सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, एसआईटी सोमवार को यह प्रारंभिक जांच रिपोर्ट उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप सकती है. इस रिपोर्ट में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को लेकर कई बेहद महत्वपूर्ण और चौंकाने वाली सिफारिशें की गई हैं, जिसमें ट्रस्ट का पुनर्गठन करना भी शामिल है.
ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों समेत 14 लोगों पर लटकी तलवार
चढ़ावा चोरी का यह मामला सामने आने के बाद राज्य सरकार ने एक विशेष जांच दल का गठन किया था, जिसने पिछले सोमवार से अपनी जांच शुरू की थी. एसआईटी ने इस पूरे मामले में अब तक करीब 150 लोगों के बयान दर्ज किए हैं. छह दिनों तक चली गहन पूछताछ के बाद कुल 14 लोगों के लिखित बयान दर्ज किए गए हैं, जिसमें ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय, सदस्य डॉ. अनिल मिश्र, व्यवस्थापक गोपाल राव और व्यवस्था से जुड़े रामशंकर यादव टीनू जैसे बड़े नाम शामिल हैं. जांच की आंच इन सभी 14 लोगों पर आ सकती है.
जांच में सामने आईं बड़ी खामियां और गबन की बातें
एसआईटी की छह दिनों की शुरुआती जांच में मंदिर की व्यवस्था और दानपात्रों की चाबियों को लेकर कई गंभीर खामियां पाई गई हैं. पूछताछ के दौरान जब ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र के बयान का मिलान रामशंकर यादव टीनू के बयान से किया गया, तो दोनों के दावों में भारी अंतर (असमानता) देखने को मिला. इसके बाद लगातार तीन दिनों तक दोनों से आमने-सामने बिठाकर पूछताछ की गई. जांच में यह भी पता चला है कि सेवादारों को मंदिर में होने वाले गबन की जानकारी पहले से ही थी. संदिग्ध पाए गए लोगों में अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, राजेश पाठक, रामशंकर, अविनाश शुक्ला और कृष्णदेव तिवारी समेत कई ट्रस्ट व बैंक अधिकारी शामिल हैं.
एसआईटी रिपोर्ट में की गई मुख्य सिफारिशें
गड़बड़ी के स्तर को देखते हुए एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में व्यवस्था को सुधारने के लिए कई बड़े सुझाव दिए हैं:
राम मंदिर ट्रस्ट का पूरी तरह पुनर्गठन किया जाए और इसमें शामिल सभी सदस्यों की समान रूप से जिम्मेदारी तय की जाए.
मंदिर ट्रस्ट में किसी प्रशासनिक अधिकारी (IAS) को मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के रूप में नियुक्त किया जाए.
इस पूरे घोटाले की गहराई से परतें खोलने के लिए विशेष जांच दल को और ज्यादा समय दिया जाए.
दान में आने वाली भारी-भरकम राशि और दानराशि की गणना का हर सप्ताह अनिवार्य रूप से ऑडिट किया जाए.
मंदिर में प्रतिदिन चढ़ावे के रूप में आने वाली नकद राशि की सीधी एंट्री बैंक में कराई जाए.
माननीय सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए निर्देशों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित हो.
मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों का वीडियो डेटा स्टोरेज बैकअप 45 दिनों से बढ़ाकर 180 दिनों का किया जाए.
जांच पूरी होने तक चंपतराय, डॉ. अनिल मिश्र और गोपाल राव समेत इस मामले से जुड़े किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति को अयोध्या छोड़ने की अनुमति न दी जाए.
सरकार ने दिए कड़े निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी को इस पूरे प्रकरण में एक सप्ताह के भीतर अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट और दो सप्ताह के भीतर अंतरिम रिपोर्ट सौंपने का सख्त निर्देश दिया है. हालांकि रविवार को इस रिपोर्ट के सौंपे जाने की चर्चाएं गर्म थीं, लेकिन सरकारी प्रवक्ताओं ने साफ किया कि रविवार को मुख्यमंत्री से अधिकारियों की कोई मुलाकात नहीं हुई है. अब सोमवार को इस रिपोर्ट के आधार पर सरकार की तरफ से कोई बड़ा फैसला लिया जा सकता है.


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