राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल उल्लंघन पर बंगाल सरकार घिरी, केंद्र ने मांगा स्पष्टीकरण
संवाददाता
9 March 2026
अपडेटेड: 1:14 PM 0thGMT+0530
9 मार्च 2026
नई दिल्ली।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान प्रोटोकॉल में कथित लापरवाही के मामले में राज्य सरकार घिर गई है। केंद्र सरकार ने इस पूरे घटनाक्रम पर राज्य प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। गृह मंत्रालय के निर्देश पर केंद्रीय गृह सचिव ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव से पूरे मामले में स्पष्टीकरण देने को कहा है।
बताया जा रहा है कि राष्ट्रपति के कार्यक्रम के दौरान व्यवस्थाओं में कई कमियां सामने आईं। रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति के लिए बनाए गए वॉशरूम में पानी की व्यवस्था नहीं थी और जिस रास्ते से उन्हें कार्यक्रम स्थल तक ले जाया गया, वह कचरे से भरा हुआ था। इसके अलावा राष्ट्रपति के स्वागत और विदाई के समय मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक की अनुपस्थिति को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
कार्यक्रम स्थल बदले जाने पर राष्ट्रपति ने जताया संतोष
सूत्रों के अनुसार राष्ट्रपति मुर्मू को 7 मार्च को आदिवासी समुदाय के वार्षिक कार्यक्रम ‘9वें अंतरराष्ट्रीय संताली सम्मेलन’ में शामिल होना था। यह कार्यक्रम पहले विधानसभा में प्रस्तावित था, लेकिन सुरक्षा और लॉजिस्टिक कारणों का हवाला देते हुए कार्यक्रम स्थल को बदलकर बागडोगरा एयरपोर्ट के पास गोपालपुर कर दिया गया। कार्यक्रम स्थल बदले जाने से राष्ट्रपति भी नाराज बताई जा रही हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि यदि कार्यक्रम विधाननगर में होता तो अधिक लोग शामिल हो पाते l
वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने सभी व्यवस्थाएं ठीक से की थीं। उन्होंने भाजपा पर राष्ट्रपति के नाम का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।
पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति के दौरे के दौरान प्रोटोकॉल उल्लंघन के मामले में केंद्र सरकार ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। इस मामले में भाजपा नेता अमित मालवीय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि कार्यक्रम स्थल बदले जाने और राष्ट्रपति के प्रति उचित प्रोटोकॉल का पालन नहीं किए जाने को लेकर सवाल उठे हैं।
प्रधानमंत्री ने जताई चिंता
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ऐसी घटनाएं केवल राष्ट्रपति का ही नहीं, बल्कि लोकतंत्र का भी अपमान हैं। उन्होंने कहा कि संविधान लोकतांत्रिक संस्थाओं की मर्यादा बनाए रखने की सीख देता है और किसी भी स्तर पर उसका सम्मान होना चाहिए।
इधर, राज्य सरकार की ओर से अभी तक इस मामले पर औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर बयानबाजी जारी है और केंद्र व राज्य के बीच विवाद और गहरा सकता है।