महान स्वतंत्रता सेनानी भारत की प्रथम महिला राज्यपाल और भारत कोकिला के नाम से विख्यात सरोजिनी नायडू की आज जयंती है।‌ इस अवसर पर संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

महात्मा गांधी को ‘मिकी माउस’ का कर बुलाती थी!

स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान और साहित्यिक विरासत को याद करते हुए सांसदों ने उनके अमूल्य योगदान का स्मरण किया।
एक कवियित्री के रूप में उन्हें ‘भारत की नाइटेंगल’ उपनाम भी दिया गया।‌ महात्मा गांधी ने उनकी कविता की रंगत उनके गीतात्मक  गुणवत्ता के कारण उन्हें भारत कोकिला कहा था।
सरोजिनी नायडू ही एकमात्र वह महिला थी जिन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को मिकी माउस कहकर संबोधित भी किया था।
आज देश भर में उन्हें उनकी जयंती पर श्रद्धापूर्वक याद किया जा रहा है।

उनका जन्म और प्रारंभिक जीवन:

उनके पिता अघोर नाथ चट्टोपाध्याय एक वैज्ञानिक और साथ ही शिक्षाविद भी थे । उनकी मां वरदसुंदरी एक कवियित्री थी।  जिससे उनके व्यक्तित्व में साहित्य और विज्ञान का अनोखा संगम देखने को मिलता था।
उनका जन्म हैदराबाद में हुआ था और बचपन से ही वह विलक्षण प्रतिभा की धनी थी। मात्र 12 वर्ष की आयु में ही उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली थी । और किशोरावस्था तक पहुंचते ही उन्होंने अंग्रेजी में लंबी कविताएं लिखकर सबको आश्चर्यचकित कर दिया था।


उनकी कविताओं में भारतीय संस्कृति के साथ अंतर्राष्ट्रीय झलक:
उन्होंने कैंब्रिज और लंदन के किंग्स कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की, जहां उनके लेखन को एक अंतरराष्ट्रीय पहचान भी मिली।
उसके बाद उनकी कविताओं में भारतीय संस्कृति ,भारत की प्रकृति और यहां के लोक जीवन की झलक देखने को मिली।
उन्होंने द गोल्डन थ्रेसोल्ड (1905) और ‘द बर्ड ऑफ टाइम’  (1912)जैसी शानदार रचनाएं दी थी।  उनकी लेखनी और उनके भावनाओं के उग्र प्रदर्शन को देखकर ही उन्हें नाइटेंगल ऑफ़ इंडिया की उपाधि मिली थी।

पहली महिला राज्यपाल बनी उत्तर प्रदेश की:

राजनीति के उनके भाषण बहुत ही प्रखर होते थे 1925 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष बनी इसके बाद उत्तर प्रदेश की पहली महिला राज्यपाल नियुक्ति में इतनी जिम्मेदारियां के बाद भी उन्होंने कविता और लेखन से दूरी नहीं बनाई।

महिलाओं की शिक्षा और अधिकारों की प्रबल समर्थक:

उनका जीवन केवल स्वतंत्रता संग्राम की कहानी नहीं बल्कि साहस संवेदनशीलता और सृजनशीलता का अद्भुत संगम बना । वे महिला शिक्षा और अधिकारों की प्रबल समर्थक थी।‌ उन्होंने देश की महिलाओं को सार्वजनिक जीवन में भागीदारी के लिए प्रेरित भी किया।‌ उनके भाषणों में राष्ट्र प्रेम के साथ-साथ महिलाओं को सामाजिक समानता देने की स्पष्ट आवाज भी सुनाई देती थी।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन में सरोजिनी नायडू के जीवन और संघर्ष पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे न केवल स्वतंत्रता आंदोलन की प्रमुख नेता थीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और कविताओं के माध्यम से समाज को प्रेरित करने वाली महान साहित्यकार भी थीं।

इस अवसर पर उपसभापति हरिवंश सहित अन्य गणमान्य सदस्यों ने भी सरोजिनी नायडू के कार्यों को याद किया। सांसदों ने कहा कि उनके विचार और कविताएं आज भी युवाओं को प्रेरणा देती हैं।

सरोजिनी नायडू को ‘भारत कोकिला’ के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने महिलाओं की शिक्षा और सशक्तिकरण के लिए भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।

सदन में श्रद्धांजलि के दौरान उनके ऐतिहासिक योगदान को नमन करते हुए कहा गया कि सरोजिनी नायडू केवल कवियत्री ही नहीं, बल्कि स्वतंत्र भारत की सांस्कृतिक और राजनीतिक पहचान की मजबूत आधारशिला थीं।